रविवार की शाम को ही राष्ट्रीय चुनाव आयोग की फुल बेंच कोलकाता पहुंच चुकी थी। सोमवार से पूरी तरह से चुनाव आयोग का प्रतिनिधिमंडल एक्शन मोड में आ गया है। एक 5 स्टार होटल में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (CEC Gyanesh Kumar) के साथ राज्य की सभी राजनैतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों की बैठक हुई। इस सर्वदलीय बैठक में कौन सी पार्टी कितने चरणों में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 करवाना चाहती है, इसे भी स्पष्ट कर दिया।
सर्वदलीय बैठक में किस पार्टी का कौन सा प्रतिनिधि पहुंचा?
सोमवार को 5 स्टार होटल के एक कमरे में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ हुई सर्वदलीय बैठक में राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा, सीपीएम और कांग्रेस के प्रतिनिधि ने भी हिस्सा लिया।
ज्ञानेश कुमार के साथ सर्वदलीय बैठक में तृणमूल से पहुंचे -
* चंद्रिमा भट्टाचार्य
* फिरहाद हकीम
* राजीव कुमार
इस बैठक में भाजपा का जो प्रतिनिधिमंडल पहुंचा उसमें शामिल थे -
* शिशिर बाजोरिया
* तापस राय
* जगन्नाथ चट्टोपाध्याय
सीपीएम के प्रतिनिधिमंडल में मौजूद थे -
* मोहम्मद सलीम
* शमीक लाहिरी
कांग्रेस ने अपने दो नेताओं को बैठक में भेजा -
* प्रदीप भट्टाचार्य
* आशुतोष चट्टोपाध्याय
इस बैठक में कौन सी पार्टी कितने चरणों में विधानसभा चुनाव करवाना चाहती है, यह मांग भी रखी।
ज्ञानेश कुमार से भाजपा के प्रतिनिधियों ने कहा कि विधानसभा चुनाव 1 ही चरण में अधिकतम 2 चरणों में सम्पन्न करवाए जाएं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि 7-8 चरणों में 6 सप्ताह तक चुनाव करवाने की जरूरत नहीं है। भाजपा की तरह ही सीपीएम के प्रतिनिधियों ने भी एक ही चरण में चुनाव करवाने की मांग रखी। सीपीएम की ओर से मोहम्मद सलीम ने कहा कि अधिकतम 2 चरणों में चुनाव करवाए जा सकते हैं। वहीं कांग्रेस के प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा कि हमने 1 चरण में चुनाव करवाने की बात कही है।
पर राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल क्या चाहती है?
इस बारे में पार्टी के नेता फिरहाद हकिम ने कहा कि हमसे चुनाव के चरणों को लेकर कोई सवाल नहीं पूछा गया और न ही हमने इस बारे में कुछ कहा। हमने आम जनता के मताधिकार की बात कही है। हम भारतीय हैं। मताधिकार देना होगा, चुनाव आयोग से हमने यहीं कहा है।
कुल मिलाकर इस सर्वदलीय बैठक के बाद यह स्पष्ट हो चुका है कि सभी विरोधी पार्टियां चाहती हैं कि 1 अथवा अधिकतम 2 चरणों में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का संचालन किया जाए। हालांकि सत्ताधारी पार्टी चुनाव के चरणों के बारे में क्या सोचती है, यह सर्वदलीय बैठक के बाद भी स्पष्ट नहीं किया गया है।