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गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से लेकर SIR में नाम कटने तक-सड़कों पर उतरी महिला ब्रिगेड! क्या ममता ने महिला वोट बैंक को फिर साध लिया?

रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी होने से कोलकाता में अब गैस की कीमत 939 रुपये हो गई है।

कोलकाताःएक झटके में रसोई गैस की कीमत 60 रुपये बढ़ गई है। इससे मध्यम वर्ग की रसोई पर सीधा असर पड़ा है। केंद्र सरकार के खिलाफ लोगों के गुस्से को राजनीतिक रूप से इस्तेमाल करने के लिए तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने रविवार को अपनी पार्टी की महिला ब्रिगेड को आंदोलन में उतारा।

सुबह ही गैस की कीमत बढ़ने के विरोध में मंच पर थाली-कड़ाही बजाकर प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन में चंद्रिमा भट्टाचार्य, शशि पांजा और कृष्णा चक्रवर्ती जैसी नेता शामिल हुईं। शाम को धरना कार्यक्रम समाप्त होने से पहले ममता बनर्जी ने गैस की कीमत बढ़ाने को लेकर केंद्र सरकार की तीखी आलोचना की।

मंच से ममता ने कहा, “गैस मिल ही नहीं रही है। मांगने पर 21 दिन पहले बुकिंग करनी पड़ती है। अगर आपके घर में गैस सिलेंडर खत्म हो जाए तो बड़ी समस्या हो जाती है। तब क्या करेंगे? लकड़ी लाकर चूल्हे पर खाना बनाना पड़ेगा।”

बीजेपी नेतृत्व ने शनिवार को ही दावा किया था कि पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति के कारण रसोई गैस की कीमत स्वाभाविक रूप से बढ़ी है। इसके जवाब में केंद्र की आलोचना करते हुए ममता ने कहा, “अमेरिका या रूस से तेल लाना पड़े तो लाएं। लेकिन गैस-तेल की कीमत बढ़ने से बाकी चीजों की कीमत भी बढ़ जाती है। आप लोग आम लोगों के बारे में नहीं सोचते।”


फेसबुक (facebook.com/MamataBanerjeeOfficial) Eisamay.com


ध्यान देने वाली बात यह है कि रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 60 रुपये बढ़ने के बाद कोलकाता में इसकी कीमत 939 रुपये हो गई है। वहीं 19 किलो के कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत 114 रुपये 50 पैसे बढ़ाकर 1990 रुपये कर दी गई है। माना जा रहा है कि इस बढ़ोतरी का असर आम और मध्यम वर्ग पर काफी पड़ेगा। मुख्यमंत्री ने इसी नाराजगी को राजनीतिक मुद्दा बनाया।

दूसरी ओर बीजेपी के केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार का कहना है, “तृणमूल कांग्रेस की अधिकतर रैलियों में काले कपड़े से चेहरा ढके महिलाएं दिखाई देती हैं। दूसरी महिलाएं वहां नहीं आतीं।”

उनका यह भी कहना है कि दुनिया के कई तेल और गैस उत्पादक देश इस समय युद्ध की स्थिति में हैं, इसलिए इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ा है।


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गैस की कीमत बढ़ने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन ममता के भाषण में SIR के जरिए अंतिम मतदाता सूची से महिलाओं के नाम काटे जाने का मुद्दा भी उठा। धरना मंच से ममता ने कहा, “बीजेपी ने महिलाओं के वोट चुन-चुनकर काटे हैं। मेरे परिवार में भी एक लड़की की शादी हुई है, उसका नाम भी काट दिया गया। क्या ये लोग गधे हैं? इन्हें कुछ भी पता नहीं।”

उन्होंने मतुआ समुदाय के लोगों के नाम कटने के मुद्दे पर भी कड़ा विरोध जताया।

हालांकि केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार का कहना है, “तृणमूल हो या बीजेपी, किसी का भी नाम समीक्षा सूची में हो सकता है। सभी को फॉर्म भरकर जमा करना होगा। हिंदू शरणार्थियों को CAA के तहत आवेदन करना होगा। अब तक 90 हजार आवेदन जमा हो चुके हैं। CAA के प्रमाणपत्र देना शुरू हो गया है। सही जानकारी देने वालों में से 90 प्रतिशत को प्रमाणपत्र मिलेगा।”

पिछले कुछ चुनावों में बार-बार देखा गया है कि महिला वोट बैंक तृणमूल कांग्रेस की ओर झुका है। चुनाव से करीब डेढ़ महीने पहले क्या ममता बनर्जी ने इस बड़े राजनीतिक हथियार को फिर तेज कर लिया है? या बीजेपी महिला वोट बैंक में सेंध लगा पाएगी? इसका जवाब चुनाव में मिलेगा।

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