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सर्वदलीय बैठक से बाहर निकलकर चंद्रिमा भट्टाचार्य का ज्ञानेश कुमार पर आरोप - मुझसे कहा Don't Shout!

बैठक में तृणमूल के प्रतिनिधियों के साथ बात करते समय काफी गहमागहमी का माहौल बन गया।

सोमवार को चुनाव आयोग के साथ सर्वदलीय बैठक हुई। इस बैठक के लिए तृणमूल कांग्रेस का जो प्रतिनिधिमंडल गया था उसमें राज्य की मंत्री व तृणमूल नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य (Chandrima Bhattacharya) भी शामिल थी। बैठक से बाहर निकलते ही चंद्रिमा भट्टाचार्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) पर बड़ा आरोप लगाया।

उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया। सिर्फ इतना ही नहीं उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने उन पर चीखते हुए कहा, 'चिल्लाए मत' (Don't Shout)। हालांकि इस मामले को लेकर भाजपा भी मैदान में उतर चुकी है।

भाजपा का कहना है कि सीपीएम के प्रतिनिधिमंडल में भी एक महिला थी। बाहर निकलकर उन्होंने ऐसा कोई आरोप नहीं लगाया। इसका मतलब है कि चंद्रिमा (भट्टाचार्य) का व्यवहार कैसा था, यह जानना भी जरूरी है।

रविवार को राज्य में ज्ञानेश कुमार समेत चुनाव आयोग की फुल बेंच कोलकाता आयी। सोमवार को सर्वदलीय बैठक भी हुई। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इसी बैठक में तृणमूल के प्रतिनिधियों के साथ बात करते समय काफी गहमागहमी का माहौल बन गया। इस बैठक में तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधि के तौर पर चंद्रिमा भट्टाचार्य के साथ फिरहाद हकीम और राजीव कुमार भी गए थे।

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बैठक से बाहर निकलकर मीडिया को संबोधित करते हुए चंद्रिमा भट्टाचार्य ने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा महिला विरोधी तो है ही। मुख्य चुनाव आयुक्त इस विरोधिता को और भी बढ़ावा दे रहे हैं। मुझसे कहा Don't Shout। अरे, मेरी आवाज में तेजी है। मैं तो Shout करके उन्हें अपमानित करते हुए कुछ नहीं कह रही थी।

मैं अपनी बात रख रही थी। इसपर ही उन्होंने कहना शुरू कर दिया Don't Shout। मैंने भी कहा I am not shouting। जो हुआ है उसे कहने का मौका तो देना पड़ेगा। हम चुनाव आयोग पर भरोसा करते हैं। वह भरोसा सच साबित नहीं हो रहा है। इसलिए ही कहना पड़ रहा है।

वहीं दूसरी ओर भाजपा के प्रतिनिधिमंडल में तापस राय शामिल थे। उन्होंने इस आरोप पर पलटवार करते हुए कहा कि वह चिल्लाने की जगह तो नहीं है। कुछ भी उल्टा-सीधा कहने की जगह भी नहीं है। मुझे नहीं पता कि चंद्रिमा क्या कह रही हैं। लेकिन सीपीएम के प्रतिनिधिमंडल में भी एक महिला थी। उन्होंने बाहर निकलकर तो ऐसी कोई शिकायत दर्ज नहीं करवायी।

अगर वह कहती हैं कि नॉर्मल वॉयस ही ऐसी है, तो वहीं कह सकती थी। हम काफी समय से उनकी आवाज सुन रहे हैं। नॉर्मल आवाज वैसी बिल्कुल नहीं है। अगर है भी तो बेंच के सामने ऐसे चीखकर बात नहीं की जा सकती है।

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