मिडिल ईस्ट में चल रहे ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच युद्ध की वजह से पाकिस्तान में दो सप्ताह के लिए स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया गया है। बताया जाता है कि यह फैसला ईंधन की बचत के लिए लिया गया है। सिर्फ इतना ही नहीं सरकारी ऑफिस भी सप्ताह में 4 दिन ही खुले रहेंगे और काम करेंगे।
मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोमवार को ईंधन की खपत को कम करने के उपायों के तहत अस्थायी रूप से ये फैसले लिए हैं।
जनसत्ता की मीडिया रिपोर्ट में रॉयटर्स के हवाले से बताया गया है कि शाहबाज शरीफ ने कहा है कि इस सप्ताह के अंत के बाद भी सभी स्कूल दो सप्ताह के लिए बंद रहेंगे। ईंधन बचाने के लिए तुरंत ऑनलाइन पढ़ाई शुरू कर दी जाएगी। यह फैसला ऊर्जा उपयोग को नियंत्रित करने के प्रयासों के तहत लिया गया है। शहबाज शरीफ ने अपने फैसले में कहा है कि ईंधन बचाने के लिए देश भर के सरकारी ऑफिसों में 4 कार्य दिवस ही होंगे। हालांकि इस फैसले में बैंक को शामिल नहीं किया गया है।
वहीं NBT की मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि शहबाज शरीफ ने सांसदों की सैलरी काटने की घोषणा भी की है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अपने बयान में शहबाज शरीफ ने कहा है कि दो महीने के लिए सरकारी महकमों की गाड़ियों को मिलने वाले तेल में 50 प्रतिशत की कटौती की जा रही है।
हालांकि इसमें एंबुलेंस और सार्वजनिक परिवहन में इस्तेमाल होने वाली बसों को शामिल नहीं किया गया है। इतना ही नहीं तेल की बचत के लिए अगले दो महीने के लिए 60 प्रतिशत सरकारी गाड़ियों को बंद किया जा रहा है। अगले 2 महीने तक न तो कैबिनेट के सदस्य और न ही अधिकारियों को वेतन मिलेगा। सांसदों की सैलरी भी 25 प्रतिशत काटी जा रही है। जिन अधिकारियों का वेतन 3 लाख से ज्यादा है उनके दो दिन का वेतन काट कर नागरिक रिलीफ के लिए खर्च किए जाएंगे।
सरकारी महकमों में एयर कंडिशनर से लेकर फर्नीचर व गाड़ियां खरीदने पर भी पाबंदी लगायी गयी है। सरकारी अधिकारियों व नेताओं को विदेशी दौरे पर पाबंदी लगायी गयी है। हालांकि इसमें देश के लिए जरूरी विदेशी यात्रिओं में छूट भी दी गयी है। इस प्रतिबंध में प्रधानमंत्री खुद और विदेश मंत्री व गवर्नरों को भी शामिल किया गया है। ईंधन की बचत के लिए ऑनलाइन मीटिंग व टेली कॉन्फ्रेंसिंग को प्राथमिकता देने के लिए कहा गया है। इफ्तार पार्टियों पर भी पाबंदी लगायी गयी है।
बता दें, ईरान युद्ध की वजह से दुनिया के कुछ सबसे महत्वपूर्ण तेल व गैस के बुनियादी ढांचे के पाइपलाइन, रिफाइनरी आदि खतरे में हैं। ईरानी हमलों के खतरों की वजह से होर्मुज प्रणाली को बंद कर दिया गया है जो दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल व लिक्विड प्राकृतिक गैस का मार्ग है। इस वजह से इराक समेत कई देशों के तेल क्षेत्रों में भंडारण क्षमता के भर जाने की वजह से उत्पादन में कटौती भी की गयी है।
इस युद्ध का वैश्विक असर पड़ रहा है। इसकी वजह से ईंधन की कीमतें अब आसमान छूने वाली हैं। मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि इस बढ़ते तनाव की वजह से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गहरा संकट मंडराने लगा है। पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने चेतावनी भी दी है कि पश्चिम एशिया के बढ़ते तनाव की वजह से मासिक तेल की आयात बिल बढ़कर 600 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।