तेहरान: ईरान के प्रेसिडेंट मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि उनकी बातों का गलत मतलब निकाला गया है। मसूद ने गल्फ देशों पर हमले रोकने और माफी से जुड़े बयान पर यह कहा है। पेजेश्कियान ने शनिवार को खाड़ी देशों पर हमले रोकने की बात कहते हुए माफी मांगी थी। हालांकि ईरानी सेना और IRGC ने इसे ना मानते हुए हमले जारी रखे हैं। मसूद की माफी की तेहरान में काफी ज्यादा आलोचना भी हुई है। ऐसे में मसूद के बदले बयान को दबाव में झुकने की तरह देखा जा रहा है।
मसूद पेजेश्कियान ने रविवार को कहा, 'मेरी बातों का दुश्मन ने गलत मतलब निकाला, जो पड़ोसियों में फूट डालना चाहता है। हमने बार-बार कहा है कि पड़ोसियों के साथ हमारे अच्छे रिश्ते होने चाहिए। हम हमलों का जवाब देने के लिए मजबूर हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमारा किसी पड़ोसी देश के साथ झगड़ा है या हम उनको परेशान करना चाहते हैं।'
ईरानी राष्ट्रपति ने क्या कहा है
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने शनिवार को टेलीविजन पर जारी एक मैसेज में कहा था, 'मुझे उन पड़ोसी देशों से माफी मांगनी चाहिए, जिन पर हमला हुआ है। पड़ोसी देशों पर हमला करने का हमारा कोई इरादा नहीं है। हम उन देशों पर अब कोई हमला नहीं करेंगे, जब तक उस तरफ से अटैक नहीं होता है।' ईरान के राष्ट्रपति के बयान पर ज्यूडिशियरी चीफ और IRGC के अफसरों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। ईरानी सेना ने राष्ट्रपति के खिलाफ जाते हुए हमले जारी रखे हैं। इससे ईरान के शासन में दो धड़े बनने और राष्ट्रपति पर दबाव की बात उजागर हुई। ऐसे में राष्ट्रपति ने अब कहा है कि उनके बयान को गलत समझा गया।
ईरान का पड़ोसी देशों से टकराव
इजरायल और अमेरिका ने 28 फरवरी से ईरान पर हमले शुरू किए हैं। इसके बाद ईरान ने इजरायल के साथ-साथ खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य बेसों को निशाना बनाया। ईरान ने सऊदी अरब, कुवैत, कतर, यूएई, बहरीन में हमले किए हैं। इससे पूरे क्षेत्र में उथलपुथल मची है। ईरान में भी पड़ोस के खाड़ी देशों पर हमले करने की रणनीति पर एक राय नहीं दिख रही है।
ईरान पर इजरायल के हमलों में जानमान का भारी नुकसान हुआ है। एक हफ्ते की इस लड़ाई में अब तक करोड़ों डॉलर की इमारतें जमींदोज हो चुकी हैं। वहीं ईरान में बड़े पैमाने पर लोगों की जान भी गई हैं। ईरान में 1500 से ज्यादा लोगों की मौत का दावा किया जा रहा है। इसमें 165 स्कूली बच्चियां भी शामिल हैं।