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क्या सच में भारत ने ईरान की पीठ में छुरा घोंपा? क्या गुप्त रूप से इज़राइल को दी जानकारी? सेना प्रमुख के वीडियो पर मचा हंगामा

इज़राइल को ईरानी जहाज़ की स्थिति बताने के आरोप में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का एक वीडियो वायरल हो गया है।

नयी दिल्लीः क्या भारत ने सचमुच ईरान के साथ विश्वासघात किया? भारत के निमंत्रण पर विशाखापत्तनम में नौसैनिक अभ्यास में भाग लेने के बाद अपने देश लौटते समय ईरान का युद्धपोत “आईआरआईएस डेना” अमेरिकी पनडुब्बी से दागे गए टॉरपीडो के हमले में डूब गया। इस घटना में ईरानी नौसेना के कम से कम 87 सैनिकों की मौत हो गई।

लेकिन सवाल उठ रहा है कि भारत से लौटते समय भारतीय महासागर में ईरानी युद्धपोत कहाँ था, इसकी जानकारी अमेरिका को कैसे मिली? क्या भारत ने ही उनकी स्थिति बता दी थी?

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी के 57 सेकंड के एक वीडियो को लेकर भारी हंगामा मच गया है।

वीडियो में क्या दिख रहा है?

वायरल वीडियो क्लिप में सेना प्रमुख को कहते हुए सुना जा रहा है: “इज़राइल हमारा करीबी सहयोगी है। जैसे ही ईरान का जहाज़ अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में पहुँचा, हमने इज़राइल को उसकी सटीक स्थिति की जानकारी दे दी।”

सोशल मीडिया पर इस वीडियो को साझा करते हुए दावा किया जा रहा है कि भारत ने इज़राइल को ईरान के युद्धपोत “आईआरआईएस डेना” की गुप्त लोकेशन बता दी थी। इसी वजह से अमेरिकी पनडुब्बी उसे नष्ट कर सकी। इसको लेकर इंटरनेट पर कई लोग भारत की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।

असली सच्चाई क्या है?

दरअसल वीडियो की जाँच करने पर पता चला कि उसमें समाचार माध्यम “फर्स्टपोस्ट” के “रायसीना डायलॉग 2026” कार्यक्रम का लोगो दिखाई दे रहा है। यह कार्यक्रम इस साल 5 मार्च से 7 मार्च के बीच आयोजित हुआ था, जबकि आईआरआईएस डेना 4 मार्च को डूब गया था।

गूगल सर्च से पता चला कि उस कार्यक्रम में सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी ने सच में एक इंटरव्यू दिया था। लेकिन उस इंटरव्यू में उन्होंने “ऑपरेशन सिंदूर” और भविष्य की सैन्य रणनीति पर बात की थी। करीब 21 मिनट के इंटरव्यू में उन्होंने ईरान या इज़राइल के बारे में एक शब्द भी नहीं कहा।

यानी यह खबर पूरी तरह फर्जी है। भारत सरकार की PIB Fact Check इकाई ने भी साफ कर दिया है कि इस वीडियो में डिजिटल हेरफेर यानी मॉर्फिंग या एडिटिंग किया गया है।

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