🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

मोदी का एक फोन और खत्म हो सकता है युद्ध! UAE के पूर्व राजदूत का बड़ा दावा

दावा किया गया है कि संयुक्त अरब अमीरात इस युद्ध में किसी भी तरह से शामिल नहीं होना चाहता।

पश्चिम एशिया में युद्ध रुकने का कोई संकेत नहीं मिल रहा है। सोमवार को भी इज़रायल ने लेबनान में फिर से हमला किया। ईरान में मृतकों की संख्या बढ़कर 1,332 हो गई है। ऐसी स्थिति में संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates) के पूर्व राजदूत हुसैन हसन मिर्जा (Hussain Hassan Mirza) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के हस्तक्षेप की मांग की।

उन्होंने कहा कि इजरायल और ईरान के राष्ट्रपति को नरेंद्र मोदी एक बार फोन कर दें तो युद्ध रुक जाएगा। साथ ही उन्होंने दावा किया कि संयुक्त अरब अमीरात इस युद्ध में किसी भी तरह से शामिल नहीं होना चाहता।

हुसैन हसन मिर्जा ने NDTV को दिए एक इंटरव्यू में संयुक्त अरब अमीरात की भौगोलिक-राजनीतिक स्थिति समझाते हुए कहा कि एक तरफ हम ईरान के पड़ोसी हैं। दूसरी तरफ 2020 के अब्राहम अकॉर्ड के अनुसार इजरायल के साथ कूटनीतिक संबंध बनाए रखने में रुचि रखते हैं। दोनों देशों ने एक-दूसरे को सहयोग का हाथ बढ़ाया है।

उनका मानना है कि इस स्थिति के कारण संयुक्त अरब अमीरात की अहमियत और जिम्मेदारी बहुत ज्यादा है। इंटरव्यू के दौरान हसन ने कहा कि हम बातचीत के जरिए समस्या का समाधान करना चाहते हैं। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए हसन ने दावा किया कि पश्चिम एशिया के नेताओं के साथ मोदी के अच्छे संबंध हैं।

साथ ही उस क्षेत्र के आम लोगों और कारोबारी समुदाय में भी उनकी काफी लोकप्रियता है। यहां तक कि इजरायल और ईरान भी मोदी का सम्मान करते हैं। इसलिए अगर प्रधानमंत्री मोदी ईरान और इजरायल के राष्ट्रपति को एक फोन कर दें, तो युद्ध रुक जाएगा। समस्या का समाधान हो जाएगा। उनका एक फोन कॉल ही काफी है।

उन्होंने कहा कि युद्ध में शामिल दोनों पक्षों के साथ ही प्रधानमंत्री मोदी के संबंध बहुत अच्छे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि संयुक्त अरब अमीरात किसी भी तरह इस युद्ध में शामिल नहीं होना चाहता। सच कहूं तो हम समझ नहीं पा रहे हैं कि हम इस युद्ध में खुद को क्यों शामिल करें। इस संघर्ष में शामिल होने का हमारे पास कोई कारण नहीं है।

गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बातचीत के जरिए समस्या का समाधान करने का संदेश देते आए हैं। उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को फोन भी किया था। साथ ही युद्ध को लेकर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से भी भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने फोन पर बातचीत की थी। उन्होंने भी ईरान को शांति का संदेश दिया था।

रूस-यूक्रेन युद्ध के समय भी नई दिल्ली का कूटनीतिक संदेश सराहा गया था। विश्व मंच पर खड़े होकर नरेंद्र मोदी ने कहा था कि यह युद्ध का युग नहीं है। पश्चिम एशिया का युद्ध अगर लंबा चलता है तो भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया के तेल बाजार पर इसका असर पड़ेगा। अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने के बाद ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई बने हैं।

इससे तनाव और बढ़ गया है। इज़रायल लगातार ईरान पर हमला कर रहा है। इन सबके बीच संयुक्त अरब अमीरात के पूर्व राजदूत की टिप्पणी ने यह स्पष्ट कर दिया है नई दिल्ली से अंतरराष्ट्रीय समुदाय की उम्मीदें और बढ़ गई हैं।

Prev Article
पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव तो पाकिस्तान में 2 सप्ताह के लिए बंद किए गए स्कूल, ऑफिस में काम सिर्फ 4 दिन, क्यों?

Articles you may like: