कोलकाताः सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में SIR का काम तेेजी से पूरा करने के लिए ज्यूडिशियल ऑफिसरों को नियुक्त करने का आदेश दिया था। इस वजह से वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन का काम जिला और निचली अदालतों के जजों को सौंप दिया गया है। यही कारण है कि जिला अदालतों में काम की रफ्तार कुछ धीमी हो गई है। ऐसे में डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी ने बताया कि 14 मार्च को राज्य के सभी जिलों में होने वाली नेशनल लोक अदालत को फिलहाल के लिए टाल दिया गया है।
एक विज्ञप्ति जारी कर बताया गया है कि यह SIR प्रक्रिया की वजह से यह फैसला लिया गया है। इस वजह से लोक अदालत पहले से तय तारीख पर नहीं लगेगी। डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (DLSA) ने कहा कि यह लोक अदालत दोबारा कब लगेगी, इसका ऐलान बाद में किया जाएगा। इस दिन राज्य के सभी जिलों में लगने वाली लोक अदालतें टाल दी गई हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि ट्रैफिक नियम तोड़ना, एक्सीडेंट, शादी के झगड़े, प्रॉपर्टी के झगड़े, असल में ऐसे मामलों का निपटारा लोक अदालतों में होता है। कभी कम खर्च में, तो कभी फ्री में। कानूनी मदद दी जाती है। इस राज्य के साथ-साथ पूरे देश में अलग-अलग कोर्ट परिसरों में साल में कई बार लोक अदालतें लगती हैं।
वैसे, 60 लाख 6 हजार 675 'डिसप्यूटेड' या विवादित वोटर 'अंडर एडजुडिकेशन' या विचाराधीन सूची में हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जज या न्यायिक अधिकारी इन वोटरों के कागजातों को जांचने के काम का निपटारा कितने समय में पूरा करेंगे और विधानसभा चुनाव शुरू होने तक इनमें से कितनों के नाम सप्लीमेंट्री लिस्ट में शामिल होंगे! कुछ हफ्ते पहले सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की बेंच ने कलकत्ता हाई कोर्ट की स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर कहा था कि अगर तब तक काम कर रहे जजों में से हर कोई एक दिन में औसतन 250 सुनवाई निपटाता है, तब भी सारा काम पूरा करने में 80 दिन लगेंगे। उस दौरान लगभग 250 जज 'SIR' पर काम कर रहे थे। CEO कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक, अभी 530 जज काम कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जरूरत पड़ने पर सिविल जजों (सीनियर और जूनियर डिवीजन) और पड़ोसी राज्य झारखंड और ओडिशा के जजों से काम कराने की भी इजाजत दी है। इसमें कोई दो राय नहीं कि इस काम में जजों को अभी और समय लगेगा।