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एक तस्वीर से विरोध! राष्ट्रपति विवाद में तृणमूल का नया हथियार, क्या है इसका इतिहास?

उम्र और बीमारी के कारण लालकृष्ण आडवाणी राष्ट्रपति भवन जाकर भारत रत्न पुरस्कार लेने नहीं जा सके थे।

कोलकाताःएक तस्वीर! जिसमें देखा जा रहा है कि दौपदी मुर्मू वरिष्ठ बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न का प्रमाणपत्र दे रही हैं। उनके बगल की कुर्सी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बैठे हुए हैं। तस्वीर में आडवाणी और मोदी को कुर्सी पर बैठे देखा गया है, जबकि राष्ट्रपति को खड़े हुए देखा गया है।

जिस समय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अपमान का आरोप लगाकर SIR मुद्दे पर उठ रहे विरोध को शांत करने की कोशिश बीजेपी कर रही है, ठीक उसी समय तृणमूल कांग्रेस ने यह तस्वीर सामने रखी है। यह तस्वीर मथुरापुर में तृणमूल के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की सभा में दिखाई गई।

तृणमूल सांसद जून मालिया और राज्य की मंत्री बीरबाहा हंसदा ने भी इस तस्वीर को ममता बनर्जी के धरना मंच पर उठाकर दिखाया। तृणमूल ने पुरानी फाइलें खंगालकर जो तस्वीर निकाली है, उस पर दो साल पहले भी विवाद हुआ था।

31 मार्च 2024 को दिल्ली में वरिष्ठ बीजेपी नेता और देश के पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के घर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गई थीं। उम्र और बीमारी के कारण आडवाणी राष्ट्रपति भवन जाकर भारत रत्न लेने नहीं जा सके थे। इसलिए राष्ट्रपति स्वयं उनके घर जाकर उन्हें यह पुरस्कार प्रदान करती दिखाई दीं। तस्वीर सार्वजनिक होते ही देश के कई विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

उस समय कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा था, “यह हमारे राष्ट्रपति का घोर अपमान है। प्रधानमंत्री को निश्चित रूप से खड़ा होना चाहिए था।”

तेजस्वी यादव ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति के सम्मान में खड़े नहीं हुए। इससे साबित होता है कि बीजेपी को संविधान पर विश्वास नहीं है।”

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “यह केवल पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति का अपमान नहीं है, बल्कि सामान्य शिष्टाचार के भी खिलाफ है। क्या यही आदिवासी, वंचित और शोषित समाज के प्रति सम्मान है? शर्मनाक!”

हालांकि इस पर अलग पक्ष भी सामने आया था। एक सोशल मीडियापोस्ट में 2017 से 2019 तकराष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के प्रेस सचिव रहे अशोक मलिक तक ने कहा था, “प्रोटोकॉल के अनुसार राष्ट्रपति भवन में पुरस्कार प्राप्त करने वाला व्यक्ति और राष्ट्रपति दोनों खड़े रहते हैं। समारोह में मौजूद अन्य लोग बैठे रहते हैं और उनके लिए खड़ा होना आवश्यक नहीं होता।”

इस बीच सिलिगुड़ी में सांताल फेडरेशन के कार्यक्रम में राष्ट्रपति के अपमान का आरोप लगाकर बीजेपी नेतृत्व तृणमूल को चुनाव से पहले घेरने की कोशिश कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है किSIR को लेकर चल रहे विरोध के बीच यह नया मुद्दा भगवा खेमे को कुछ हद तक उत्साहित कर रहा है।

इसी दौरान तृणमूल ने भी 'तस्वीर की राजनीति' का सहारा लिया है। राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार,“राष्ट्रपति और आदिवासी समाज की प्रतिनिधि का किस तरह अपमान किया गया, यह इस तस्वीर से साफ दिखाई देता है। राष्ट्रपति को लेकर राजनीति की शुरुआत बीजेपी ने की थी। इसका जवाब जनता चुनाव में देगी।”

दूसरी ओर बीजेपी के केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा, “क्या किसी राष्ट्रपति के साथ ऐसा किया जा सकता है? अगर द्रौपदी मुर्मू की जगह प्रणव मुखर्जी होते तो क्या ऐसा किया जाता? यह पूरे आदिवासी समाज का अपमान है। सिर्फ इसलिए ऐसा किया गया क्योंकि वह आदिवासी हैं।”

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