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न्यायपालिका पर विवादित अध्यायः एनसीईआरटी ने कक्षा 8 की किताब वापस ली, बिना शर्त माफी मांगी

कक्षा 8 की एक सामाजिक विज्ञान की किताब के एक अध्याय में न्यायपालिका की कार्यप्रणाली और उसमें भ्रष्टाचार से जुड़ी बातों का उल्लेख किया गया था।

By डॉ. अभिज्ञात

Mar 10, 2026 13:25 IST

नयी दिल्लीः राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी एनसीईआरटी ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की एक किताब को वापस लेने के बाद उसके एक अध्याय के लिए बिना शर्त माफी मांगी है। यह किताब “एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड” नाम से प्रकाशित की गई थी। इसमें अध्याय 4 का शीर्षक था “हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका”। इसी अध्याय में “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” नाम का एक उप-अध्याय भी शामिल था, जिस पर विवाद खड़ा हो गया।

एनसीईआरटी के निदेशक और परिषद के अन्य सदस्यों ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वे अध्याय 4 के लिए बिना शर्त और पूर्ण रूप से माफी मांगते हैं। परिषद ने यह भी बताया कि पूरी किताब को बाजार से वापस ले लिया गया है और अब यह उपलब्ध नहीं होगी। परिषद ने कहा कि इस मामले से जो असुविधा हुई है उसके लिए उसे खेद है और वह शैक्षिक सामग्री में सटीकता, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

यह विवाद उस समय बढ़ गया जब इस अध्याय में न्यायपालिका की कार्यप्रणाली और उसमें भ्रष्टाचार से जुड़ी बातों का उल्लेख किया गया। इसके बाद इस विषय पर आपत्ति जताई गई और मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच गया। सर्वोच्च न्यायालय ने 26 फरवरी को आदेश देते हुए इस किताब के प्रकाशन और प्रसार पर पूरी तरह रोक लगा दी। अदालत ने कहा कि इस किताब को आगे न छापा जाए और न ही किसी भी माध्यम से फैलाया जाए।

एनसीईआरटी ने एक सलाह जारी करते हुए लोगों से अपील की कि यदि किसी व्यक्ति या संस्था के पास यह किताब या उससे जुड़ी कोई सामग्री है तो उसे जल्द से जल्द एनसीईआरटी के सामाजिक विज्ञान शिक्षा विभाग या प्रकाशन विभाग, श्री अरविंद मार्ग, नई दिल्ली में वापस जमा करा दिया जाए। परिषद ने यह भी कहा कि यदि इस अध्याय से जुड़ी कोई सामग्री सोशल मीडिया या डिजिटल मंचों पर साझा की गई है तो उसे भी जल्द से जल्द हटा दिया जाए।

सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था किसी दूसरे नाम से वही सामग्री प्रकाशित करने या डिजिटल माध्यम से फैलाने की कोशिश करती है तो इसे अदालत के आदेश की अवहेलना माना जाएगा। इसके साथ ही अदालत ने एनसीईआरटी को यह निर्देश भी दिया कि वह उस समिति का पूरा रिकॉर्ड अदालत के सामने प्रस्तुत करे जिसने इस अध्याय को मंजूरी दी थी। इसमें विकास दल के सभी सदस्यों के नाम, उनकी योग्यता और अन्य विवरण शामिल करने को कहा गया है।

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