राज्य के लगभग 60 लाख मतदाताओं का नाम अंडर एजूडिकेशन (Under Adjudication) सूची में रखा गया है। सप्लिमेंट्री मतदाता सूची के जारी होने से पहले ही क्या चुनाव की घोषणा कर दी जाएगी? अगर सप्लिमेंट्री मतदाता सूची के जारी होने से पहले चुनाव की घोषणा हो जाती है तो मतदाताओं का क्या भविष्य होगा? मंगलवार को कोलकाता में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से कई बार यह सवाल पूछा गया। इसके बावजूद इस बारे में कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका।
8 मार्च को चुनाव आयोग की फुल बेंच कोलकाता आयी थी जिसका नेतृत्व मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार कर रहे थे। आज (10 मार्च) को चुनाव आयोग के प्रतिनिधि दिल्ली वापस लौट जाने वाले हैं लेकिन उससे पहल संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया गया।
संवाददाता सम्मेलन में उनसे पूछा गया कि अंडर एजूडिकेशन सूची में मौजूद मतदाताओं का भविष्य क्या होगा? अगर चुनाव की घोषणा हो जाती है तो ऐसे मतदाता क्या करेंगे? इसके जवाब में ज्ञानेश कुमार ने कहा कि वह प्रक्रिया चल रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही सभी काम किए जा रहे हैं।
Read Also | EVM की जांच से लेकर मोबाइल पर सख्ती - विधानसभा चुनाव को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार की बड़ी घोषणाएं
कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के निर्देशानुसार ज्यूडिशियल अधिकारी यह फैसला ले रहे हैं कि मतदाता योग्य है अथवा नहीं। इसके आधार पर ही सप्लिमेंट्री सूची जारी की जाएगी। अप्रुवल लिस्ट वेबसाइट पर जारी होगी। अगर कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक हो लेकिन मतदाता सूची में उसका नाम न हो तो फॉर्म 6 भरकर वोटर लिस्ट में अपना नाम शामिल कर सकता है।
#WATCH | Kolkata, West Bengal: Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar says, "The process of SIR revision of about 60 crore voters in 12 states of India and earlier in Bihar is almost complete. The sole objective was that no eligible voter should be left out, but along with pic.twitter.com/a18dMzedD1
— ANI (@ANI) March 10, 2026
SIR को लेकर भाजपा नेता लगातार यह दावा कर रहे हैं कि 1 करोड़ बांग्लादेशी व रोहिंग्या मतदाताओं का नाम हटाया जाएगा। अब तक कितने बांग्लादेशी और रोहिंग्या मतदाताओं का नाम हटाया गया है? इस सवाल के जवाब में ज्ञानेश कुमार ने कहा कि कोई राजनीतिक पार्टी क्या कह रहा है, राजनीति से जुड़ा कोई व्यक्ति क्या दावा करता है, किसी भी राजनैतिक बयान का जवाब चुनाव आयोग नहीं देता है। चुनाव आयोग संविधान व कानून के आधार पर चलता है।
Read Also | कब घोषित हो सकती है पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तारीखें?
उन्होंने बताया कि एन्यूमरेशन फॉर्म भरने के बाद चुनाव आयोग को जब वह मिला तो 4 से 5 प्रतिशत लोग 2002 के इलेक्टोरल रोल से खुद को मैप नहीं कर पाए। उन्हें चुनाव आयोग ने अनमैप्ड करार दिया। 7 से 8 प्रतिशत ऐसे लोग थे, जिन्होंने खुद को मैप तो किया लेकिन कुछ न कुछ गलती रह गयी थी। इस लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी की वजह से ERO, AERO ने सुनवाई के लिे बुलाया। जिन लोगों ने सही दस्तावेज पेश किया, उसे ठीक भी कर दिया गया है।
पश्चिम बंगाल समेत 12 अन्य राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की घोषणा तो की गयी थी लेकिन माइक्रो ऑब्जर्वर सिर्फ बंगाल में क्यों? कुमार ने इसका जवाब देते हुए कहा कि बंगाल में ERO और AERO के पास बड़ी संख्या में अनसुलझे मामले थे। इसलिए माइक्रो ऑब्जर्वर की नियुक्ति करनी पड़ी। SIR की प्रक्रिया स्वच्छ मतदाता सूची के लक्ष्य से ही संचालित की जा रही है।
कितने चरणों में चुनाव होगा? इसके जवाब में ज्ञानेश कुमार ने कहा कि पश्चिम बंगाल की कानून-व्यवस्था की परिस्थिति के बारे में सब कुछ सोच-विचार कर ही इस बाबत कोई फैसला लिया जाएगा।