दुबई : योगेश दोशी भारतीय व्यवसायी हैं। लेकिन वर्तमान में वह स्थायी रूप से दुबई में ही रह रहे हैं। पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण दुबई में फंसे कई भारतीयों के रक्षक बनकर उन्होंने आगे कदम बढ़ाया। योगेश ने अपने 64 फ्लैटों के पूरे अपार्टमेंट को ही फंसे भारतीयों के लिए खोल दिया है।
योगेश अल मिजान ग्रुप के चेयरमैन हैं। पिछले दो दशकों से दुबई के रियल एस्टेट व्यवसाय से उनकी कंपनी जुड़ी हुई है। कई सरकारी परियोजनाओं को भी उन्होंने कुशलता से संभाला है। लेकिन 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के दिन ही दुबई में इरान ने हमला किया।
उसके बाद से शहर में लगातार एक के बाद एक विस्फोट हो रहे हैं। लगातार हमलों के कारण बीच-बीच में दुबई हवाई अड्डा भी आंशिक रूप से बंद करना पड़ रहा है। उड़ानों में व्यवधान पड़ा है। परिणामस्वरूप हजारों भारतीय फंसे हुए हैं।
देश के लोगों की ऐसी दयनीय स्थिति देखकर चुप नहीं बैठ सके योगेश दोशी। अपने 64 फ्लैटों में से एक पूरा आवास ही फंसे भारतीयों के लिए खोल दिया। केवल फ्लैट में रहने की सुविधा ही नहीं दी, बल्कि उनका भोजन और पीने का पानी भी उन्होंने उपलब्ध कराया। लेकिन योगेश अकेले नहीं हैं। उन्होंने बताया कि दुबई में इंडियन पीपल्स फोरम यूएई और भारत के कौंसुलेट जनरल की मदद से ही यह कार्य जारी है। भारतीयों के लिए उन्होंने अपने फ्लैट केवल उनके रहने के लिए ही खोले हैं।
योगेश अकेले नहीं हैं। दुबई के कई अन्य भारतीय व्यवसायी भी इस कार्य में शामिल हुए हैं। धीरज जैन ने आजमान शहर में फंसे भारतीयों के लिए अपने फार्महाउस को खोला है। अपने जेब खर्च से भोजन की व्यवस्था भी की है। केवल इतना ही नहीं, दुबई और आसपास के क्षेत्रों में फंसे भारतीयों को खोजने के लिए अपने 11 वाहन दिए हैं। इनमें 6 रोल्स रॉयस भी शामिल हैं।
28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल की संयुक्त सेना ने इरान पर हमला किया। उसके बाद से पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू हो गया। इसका प्रभाव संयुक्त अरब अमीरात पर भी पड़ा। दुबई और अबू धाबी में कई विस्फोट हुए। दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के एक टर्मिनल को भी नुकसान पहुंचा।