नई दिल्ली : तृणमूल कांग्रेस (TMC) मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की योजना बना रही है। सांसद सौगत राय ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया।
यहां पत्रकारों से बात करते हुए राय ने कहा कि यह प्रस्ताव भारत के संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत लाया जाएगा, जो चुनाव आयोग की शक्तियों और कार्यों से संबंधित है।
उन्होंने कहा, “हम संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाएंगे। उनके खिलाफ हमारी कई शिकायतें हैं।”
राय ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया ने गंभीर चिंताएं पैदा की हैं और इस मुद्दे को संसद में उजागर किया जाना चाहिए। जिस तरह SIR को संभाला गया, जिस तरह लोगों की जान गई और जिस तरीके से मतदाता सूची प्रकाशित की गई, उसे संसद में सामने लाया जाना चाहिए।
#WATCH | Delhi | TMC MP Saugata Roy says," 59 lakh voters are on the Adjudication list, which is a huge number. What Mamata Banerjee is saying is right...We will move it (impeachment motion against CEC Gyanesh Kumar) in the Rajya Sabha in a few days." pic.twitter.com/jD547vYrov
— ANI (@ANI) March 10, 2026
TMC सांसद ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ चल रही अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनकी पार्टी महाभियोग प्रस्ताव लाएगी। स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के बाद हमें उम्मीद है कि हमारा महाभियोग या हटाने का प्रस्ताव आगे बढ़ेगा।
मालूम हो कि पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर तृणमूल कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच तनाव बढ़ गया है।
इस सप्ताह की शुरुआत में तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर संशोधन प्रक्रिया में “गंभीर अनियमितताओं” का आरोप लगाया और कहा कि लाखों योग्य मतदाताओं के नाम गलत तरीके से सूची से हटाए जा सकते हैं। यह प्रक्रिया नियमों के उल्लंघन, तकनीकी विफलताओं और मनमाने फैसलों से प्रभावित रही है, जिससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर असर पड़ सकता है।
TMC ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव पंजीकरण अधिकारियों के अधिकारों को दरकिनार किया गया और संशोधन से जुड़े निर्देश आधिकारिक लिखित आदेशों की बजाय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए अनौपचारिक रूप से भेजे गए। पार्टी ने मतदाताओं के नाम हटाने के पैमाने पर भी चिंता जताई और दावा किया कि इस प्रक्रिया के दौरान 63 लाख से अधिक नाम हटाए गए, जबकि 60 लाख से ज्यादा मतदाताओं के मामले अभी भी विचाराधीन हैं।
इससे पहले 28 फरवरी को चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के SIR के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी की थी। आयोग के अनुसार दिसंबर 2025 में प्रारूप सूची प्रकाशित होने के बाद फॉर्म-7 के माध्यम से 5,46,053 मतदाताओं के नाम हटाए गए।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 28 फरवरी को अंतिम सूची जारी होने के बाद पश्चिम बंगाल में कुल मतदाताओं की संख्या 7.04 करोड़ से अधिक हो गई है, जो संशोधन से पहले 7.66 करोड़ थी।
इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी संशोधन प्रक्रिया की आलोचना करते हुए भारतीय जनता पार्टी पर असली मतदाताओं के नाम सूची से हटाकर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। ममता बनर्जी इस मुद्दे को लेकर धरना दे थीं, जो आप समाप्त हो गया। वहां उन्होंने चेतावनी दी कि मतदाताओं के अधिकार बहाल किए जाने चाहिए। हालांकि चुनाव आयोग ने संशोधन प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा है कि आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।