लंदन: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ब्रिटेन ने क्षेत्र में अपने सैन्य अभियानों को और सक्रिय कर दिया है। ब्रिटेन की वायुसेना ने इराकी हवाई क्षेत्र में गठबंधन बलों की ओर बढ़ रहे एक ड्रोन को मार गिराने की कार्रवाई की है। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय (MoD) ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि एक ब्रिटिश काउंटर-अनक्रूड एरियल सिस्टम (Counter-UAS) इकाई ने रात के दौरान इस ड्रोन को निशाना बनाया। यह ड्रोन इराकी हवाई क्षेत्र से होकर गठबंधन सेनाओं की दिशा में बढ़ रहा था।
रक्षा अभियानों में 230 घंटे की उड़ान
ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के अनुसार, मध्य पूर्व में चल रहे अभियानों के तहत ब्रिटिश पायलट अब तक 230 घंटे से अधिक उड़ान भर चुके हैं। इन अभियानों का उद्देश्य क्षेत्र में ब्रिटेन के नागरिकों, सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि मानवीय और चिकित्सा सहायता से लैस RFA Lyme Bay नामक लैंडिंग शिप को एहतियात के तौर पर उच्च सतर्कता पर रखा गया है। जरूरत पड़ने पर यह जहाज पूर्वी भूमध्यसागर में समुद्री अभियानों में सहायता कर सकता है।
ट्रंप ने ब्रिटेन की आलोचना की
इस घटनाक्रम से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की आलोचना की थी। ट्रंप ने आरोप लगाया था कि अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के दौरान ब्रिटेन ने पर्याप्त समर्थन नहीं दिया।
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को उन देशों की जरूरत नहीं है जो युद्ध जीतने के बाद उसमें शामिल होने का फैसला करते हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि ब्रिटेन अब पश्चिम एशिया में दो विमानवाहक पोत भेजने पर विचार कर रहा है।
यूरोपीय देशों की सैन्य गतिविधियां बढ़ीं
हालांकि ब्रिटेन और फ्रांस ने अमेरिका-इजराइल के ईरान पर हमले में सीधे भाग नहीं लिया है, लेकिन दोनों देशों ने क्षेत्र में अपने नागरिकों और हितों की रक्षा के लिए सैन्य तैयारियां बढ़ा दी हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक ब्रिटेन और फ्रांस ने अपनी नौसेना और वायुसेना को तैयार रखा है ताकि ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई से निपटा जा सके।
इसी क्रम में ग्रीस ने भी साइप्रस के पास अपने युद्धपोत और विमान भेजे हैं।
यूरोपीय देशों की सुरक्षा रणनीति
ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और पोलैंड के रक्षा मंत्रियों ने हाल ही में पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा के लिए एक संयुक्त कॉल की। ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने कहा कि इन देशों की सेनाएं अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सहयोगी देशों का समर्थन करने के लिए तैयार हैं।
इस बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे से बाहर हो सकती है। इसके बावजूद फ्रांस ने साइप्रस की सुरक्षा के लिए वायु रक्षा प्रणाली और एक युद्धपोत भेजने की घोषणा की है।
समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर भी फोकस
नीदरलैंड भी फ्रांस के अनुरोध पर अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए अपने सैन्य संसाधन तैनात करने पर कर रहा है।विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच यूरोपीय देश सीधे युद्ध में शामिल हुए बिना अपने नागरिकों, सैन्य ठिकानों और व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहे हैं।