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पश्चिम एशिया तनाव पर भारत की नजर, जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री से की बातचीत

होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और ऊर्जा आपूर्ति पर असर के बीच कई देशों से संपर्क में नई दिल्ली

By श्वेता सिंह

Mar 11, 2026 01:42 IST

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर उसके प्रभाव को देखते हुए भारत ने कूटनीतिक स्तर पर अपनी सक्रियता तेज कर दी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर विस्तृत बातचीत की।

जयशंकर ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि दोनों नेताओं के बीच मौजूदा संघर्ष से जुड़े ताजा घटनाक्रम पर विस्तार से चर्चा हुई और आगे भी संपर्क बनाए रखने पर सहमति बनी। पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद यह दोनों नेताओं के बीच तीसरी बातचीत है।

ईरान में नेतृत्व परिवर्तन के बाद संपर्क बढ़ा

यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब हाल ही में ईरान में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ है। अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले में आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता घोषित किया गया है। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।

हालांकि दोनों विदेश मंत्रियों की बातचीत में किन-किन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई, इसका पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।

ऊर्जा सुरक्षा पर भारत ने जताई चिंता

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ रहा है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही लगभग बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस कीमतों में तेजी आई है।

यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है, क्योंकि दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी का परिवहन इसी रास्ते से होता है। ऐसे में भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए यह स्थिति रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बन गई है।

यूरोप और एशिया से साधा संपर्क

पश्चिम एशिया संकट पर भारत ने अन्य प्रमुख देशों के साथ भी संवाद जारी रखा है। जयशंकर ने जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल से फोन पर बातचीत कर क्षेत्रीय स्थिति और इसके वैश्विक प्रभावों पर विचार-विमर्श किया।

इसके अलावा उन्होंने दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून से भी चर्चा की। इस बातचीत में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ पश्चिम एशिया संकट और उसके ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ने वाले असर पर भी विचार किया गया।

भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों पर मंथन

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने उम्मीद जताई कि इस वर्ष उच्च स्तरीय बैठकों और संवाद के जरिए दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत किया जाएगा। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के अगले दो महीनों में भारत दौरे की संभावना भी जताई जा रही है।

जयशंकर ने भी रणनीतिक आर्थिक सहयोग को बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच इस क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

संतुलित कूटनीति की रणनीति

विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत एक संतुलित कूटनीतिक रणनीति अपनाने की कोशिश कर रहा है। एक ओर भारत ईरान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय साझेदारों के साथ संवाद बनाए हुए है, वहीं दूसरी ओर यूरोप और एशिया के प्रमुख देशों के साथ भी समन्वय बढ़ा रहा है। भारत की प्राथमिकता क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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