वारसॉ : पोलैंड की राजधानी वारसॉ में जंगली पक्षियों के लिए एक नया आपात केंद्र शुरू किया गया है, जहां घायल और बीमार पक्षियों का इलाज किया जाएगा।
एक व्यक्ति, मार्सिन यार्ज़ेब्स्की के घर की खिड़की से एक छोटा पक्षी बुलफिंच टकरा गया। उसने उसे रात भर संभालकर रखा, लेकिन समझ गया कि उसे इलाज की जरूरत है। अगली सुबह वह उसे वारसॉ चिड़ियाघर के इस नए केंद्र में ले गया।
इस केंद्र में एक खास तरह की व्यवस्था है, जिसमें धातु के डिब्बे लगे हैं, जहां लोग घायल पक्षियों को सुरक्षित रख सकते हैं। ये बॉक्स सर्दियों में पक्षियों को गर्म रखते हैं और तुरंत अस्पताल को सूचना भेज देते हैं। इसके बाद डॉक्टर आकर पक्षियों को इलाज के लिए ले जाते हैं।
यह सुविधा फरवरी में शुरू हुई है और इससे चिड़ियाघर के पक्षी अस्पताल का काम और बेहतर हुआ है। यह अस्पताल 1998 से चल रहा है और हर साल करीब 9,000 पक्षियों का इलाज करता है।
चिड़ियाघर के निदेशक ने कहा कि इंसानों की जिम्मेदारी है कि वे उन जीवों की मदद करें, जिनका प्राकृतिक वातावरण इंसानों की वजह से प्रभावित हुआ है। अस्पताल में आमतौर पर गौरैया, कबूतर, स्टारलिंग जैसे पक्षी आते हैं, लेकिन कभी-कभी दुर्लभ प्रजातियां भी देखने को मिलती हैं।
डॉक्टरों के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण सर्दियां पहले से गर्म हो गई हैं, जिससे कई पक्षी अब प्रवास (माइग्रेशन) नहीं कर रहे। लेकिन अचानक कड़ाके की ठंड पड़ने से वे बीमार हो रहे हैं और कमजोर हो जाते हैं।
यह परियोजना शहर के नागरिकों के फंड से भी आंशिक रूप से चलाई गई है। अब लोग घायल पक्षियों की मदद के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों ने लोगों से यह भी कहा है कि वे हर छोटे पक्षी को उठाकर न ले जाएं, क्योंकि कई बार वह सिर्फ उड़ना सीख रहा होता है, अनाथ नहीं होता।
अस्पताल में पक्षियों को खाना, दवा और देखभाल दी जाती है। जब वे स्वस्थ हो जाते हैं, तो उन्हें फिर से प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि उनका अंतिम लक्ष्य पक्षियों को ठीक करके उन्हें फिर से आजादी देना है।