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ईरान से भागकर पुतिन की शरण में ईरान के नए सुप्रीम लीडर? चौंकाने वाली रिपोर्ट लीक

अमेरिका - इजराइल हमले में गंभीर रूप से घायल रूस में इलाज चल रहा है मोजतबा का?

तेहरान : पश्चिम एशिया के युद्ध में चौंकाने वाला मोड़। युद्ध चल रहा है लेकिन इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई जिंदा हैं या नहीं, अगर हैं तो वे कहां हैं? उनके जो ऑडियो या वीडियो सामने आ रहे हैं, क्या वे नकली हैं या कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से बनाए गए हैं ये सवाल बार-बार सोशल मीडिया से लेकर भू-राजनीतिक विश्लेषकों की चर्चाओं में उठ रहे हैं। इसी बीच एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है।

इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मोजतबा खामेनेई अब ईरान में नहीं हैं। कहा जा रहा है कि अमेरिका - इजराइल के हमले में मोजतबा गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और उनका एक पैर काटना पड़ा है। इसके बाद वह गुप्त रूप से मॉस्को चले गए। फिलहाल वहीं उनका इलाज चल रहा है।

डिजिटल हेरफेर और घायल होने की अटकलें

द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी यानी युद्ध के पहले दिन के हमले में मोजतबा के पैर और हाथ गंभीर रूप से घायल हुए थे। साइप्रस में नियुक्त ईरान के राजदूत अलीरेजा सालारियन ने इसे स्वीकार किया है।

इसी समय बीबीसी वेरिफाई के विशेषज्ञों ने बताया कि कुछ दिन पहले ईरान के सरकारी टेलीविजन पर सुप्रीम लीडर की जो तस्वीर दिखाई गई थी, वह पूरी तरह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से बनाई गई थी।

पुतिन के ठिकाने पर गुप्त शरण

कुवैत के अखबार अल‑जरिदा की रिपोर्ट के अनुसार मोसाद से बचाने के लिए मोजतबा को बेहद गोपनीय तरीके से रूसी सैन्य विमान से मॉस्को ले जाया गया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उन्हें सीधे क्रेमलिन के ‘न्यूक्लियर अम्ब्रेला’ यानी ‘परमाणु छाते’ के नीचे शरण दी है, ताकि अमेरिका या इजराइल उन पर हमला न कर सके।

नेतृत्वहीन बारूद का ढेर

अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने बताया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां इस बात को लगभग सुनिश्चित मान रही हैं कि मोजतबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल हैं। भू-राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार शीर्ष नेता की अनुपस्थिति में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) अब ‘ऑटोपायलट’ मोड में चल रही है। यानी कोई केंद्रीय नियंत्रण नहीं है।

हालांकि युद्ध की शुरुआत से ही ईरानी नेतृत्व ने इसे स्वीकार किया था। उन्होंने कहा था कि ‘मोजाइक डिफेंस’ रणनीति के तहत छोटे-छोटे कमांडरों के नेतृत्व में अलग-अलग मोर्चों पर आईआरजीसी लड़ाई जारी रखे हुए है। केंद्रीय नियंत्रण न होने के कारण पश्चिम एशिया का युद्ध और भी भयावह रूप ले चुका है।

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