वाशिंग्टनः अमेरिका में राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र के शीर्ष स्तर पर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर के निदेशक जो केंट (Joe Kent) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वे “ईमानदारी से” डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) प्रशासन के ईरान के खिलाफ युद्ध का समर्थन नहीं कर सकते।
“ईरान से कोई तात्कालिक खतरा नहीं था”
जो केंट ने सोशल मीडिया पर अपने बयान में कहा कि ईरान से अमेरिका को कोई तत्काल खतरा नहीं था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह युद्ध इजरायल और उसके अमेरिकी लॉबी के दबाव में शुरू किया गया। हालांकि, इस पर व्हाइट हाउस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
कौन हैं जो केंट?
जो केंट को पिछले साल जुलाई में 52-44 वोट से इस पद पर नियुक्त किया गया था। नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर के प्रमुख के रूप में उनकी जिम्मेदारी आतंकवादी खतरों का विश्लेषण और पहचान करना था। राजनीति में आने से पहले केंट ने वॉशिंगटन राज्य से कांग्रेस के लिए दो बार चुनाव लड़ा। हालांकि सफलता नहीं मिली। वे अमेरिकी सेना में ग्रीन बेरेट (Green Beret) के रूप में 11 बार तैनात रहे और बाद में सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) के साथ भी काम किया।
विवादों से भी रहा नाता
केंट की नियुक्ति के दौरान डेमोक्रेटिक पार्टी ने उनका कड़ा विरोध किया था। उन पर दक्षिणपंथी (Far-right) समूहों और साजिश सिद्धांतों से जुड़े होने के आरोप लगे थे। बताया गया कि उन्होंने अपने चुनाव अभियान के दौरान प्राउड ब्वायज जैसे समूह से जुड़े व्यक्ति को भुगतान किया था और पैट्रियट प्रेयर (Patriot Prayer) जैसे संगठनों के साथ भी करीबी संबंध रहे।
राजनीतिक खींचतान भी सामने आई
सीनेट सुनवाई के दौरान केंट ने 6 जनवरी 2021 को अमेरिकी कैपिटल पर हुए हमले से जुड़े कुछ विवादित दावों से दूरी बनाने से इनकार कर दिया था। साथ ही उन्होंने 2020 के चुनाव परिणामों को लेकर भी विवादित बयान दिए थे। डेमोक्रेट्स ने राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के एक ग्रुप चैट में उनकी भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए थे, जहां संवेदनशील सैन्य योजनाओं पर चर्चा हुई थी।
विवादों के बावजूद रिपब्लिकन नेताओं ने केंट के अनुभव का समर्थन किया। सीनेटर टॉम कॉटन (Tom Cotton) ने कहा कि केंट ने अपना पूरा करियर आतंकवाद से लड़ने और अमेरिका की सुरक्षा सुनिश्चित करने में लगाया है।
क्या संकेत देता है यह इस्तीफा ?
जो केंट का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब अमेरिका की विदेश नीति और सैन्य रणनीति को लेकर अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। यह घटनाक्रम न केवल ट्रंप प्रशासन के फैसलों पर सवाल उठाता है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे में भी विभाजन की ओर इशारा करता है।