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फर्जी लोन ऐप्स पर कड़ा शिकंजा, सरकार और RBI ने बढ़ाई निगरानी

डिजिटल लेंडिंग पर कड़ा नियमन, ब्लॉकिंग से लेकर जागरूकता तक बहु-स्तरीय रणनीति लागू।

By श्वेता सिंह

Mar 17, 2026 19:12 IST

नई दिल्लीः देश में तेजी से बढ़ रहे फर्जी डिजिटल लोन ऐप्स (Fraudulent Loan Apps) पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार और Reserve Bank of India (भारतीय रिज़र्व बैंक / RBI) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि आम नागरिकों को अवैध मोबाइल प्लेटफॉर्म से होने वाले शोषण से बचाने के लिए एक समन्वित रणनीति लागू की गई है।

डिजिटल लेंडिंग पर सख्त गाइडलाइंस

सरकार के अनुसार, RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक) ने डिजिटल लेंडिंग (Digital Lending) के लिए विस्तृत नियामक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनका उद्देश्य मोबाइल ऐप्स के जरिए दिए जाने वाले ऋण को एक मजबूत और पारदर्शी ढांचे में लाना, उपभोक्ता संरक्षण बढ़ाना और पूरे डिजिटल इकोसिस्टम को सुरक्षित बनाना है।

इन नियमों के तहत सभी रेगुलेटेड एंटिटीज (Regulated Entities / REs) को सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करना होगा। निगरानी के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी मिलने पर सुधार के निर्देश दिए जाते हैं और जरूरत पड़ने पर सख्त प्रवर्तन (Enforcement) कार्रवाई भी की जाती है।

फर्जी ऐप्स पर टेक्नोलॉजी से प्रहार

अवैध डिजिटल प्लेटफॉर्म के नेटवर्क को तोड़ने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत फर्जी ऐप्स को ब्लॉक कर रहा है।

इसके साथ ही इंटरनेट इंटरमीडियरी और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे टेक्नोलॉजी आधारित सख्त जांच (Vetting) और रियल-टाइम निगरानी (Real-time Enforcement) तंत्र लागू करें, ताकि विदेशी स्रोतों से चलने वाले अवैध लोन ऐप्स के विज्ञापनों को रोका जा सके।

‘DLA’ डायरेक्टरी: असली-नकली की पहचान आसान

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 1 जुलाई 2025 को अपनी वेबसाइट पर ‘डिजिटल लेंडिंग ऐप्स (Digital Lending Apps / DLAs)’ की एक डायरेक्टरी शुरू की है। यह सूची ग्राहकों को यह जांचने में मदद करती है कि कोई ऐप RBI से मान्यता प्राप्त संस्था से जुड़ा है या नहीं। इससे फर्जी ऐप्स की पहचान करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है।

शिकायत दर्ज करना हुआ आसान

साइबर अपराध की रिपोर्टिंग को आसान बनाने के लिए इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर / I4C) के जरिए राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (National Cybercrime Reporting Portal) और हेल्पलाइन नंबर 1930 उपलब्ध कराया गया है।

इसके अलावा ‘SACHET’ पोर्टल और स्टेट लेवल कोऑर्डिनेशन कमेटी के माध्यम से भी अवैध धन वसूली के मामलों की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

जागरूकता पर भी जोर

भारतीय रिजर्व बैंक और बैंकिंग संस्थाएं एसएमएस, रेडियो और ई-बैंकिंग जागरूकता एवं प्रशिक्षण (e-BAAT) कार्यक्रमों के जरिए लोगों को डिजिटल फ्रॉड से बचने के तरीके बता रही हैं। इन अभियानों का उद्देश्य ग्राहकों को जोखिम पहचानने और सुरक्षित लेनदेन के प्रति जागरूक बनाना है।

राज्यों की अहम भूमिका

सरकार ने स्पष्ट किया है कि ‘पुलिस’ और ‘पब्लिक ऑर्डर’ (Public Order) संविधान के अनुसार राज्य विषय हैं। इसलिए अपराधों की रोकथाम, जांच और कार्रवाई की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की कानून-व्यवस्था एजेंसियों की ही है। केंद्र सरकार इस दिशा में सलाह और क्षमता निर्माण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

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