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एलपीजी संकट से दार्जिलिंग चाय उद्योग में बढ़ी चिंता, उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका

हाल ही में कोलकाता में टी बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन को लिखे एक पत्र में दार्जिलिंग टी एसोसिएशन ने इस संकट की जानकारी दी है।

दार्जिलिंग : एलपीजी संकट के माहौल में दार्जिलिंग के चाय उद्योग को लेकर नई चिंता सामने आई है। यदि उद्योग में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी गैस की आपूर्ति कम हो जाती है, तो दार्जिलिंग चाय का उत्पादन और घट सकता है, ऐसी चेतावनी दार्जिलिंग टी एसोसिएशन ने दी है।

इस स्थिति में पश्चिम बंगाल के पहाड़ी जिले में स्थित चाय कारखानों में आपूर्ति बाधित होने की आशंका पैदा हो गई है।

हाल ही में कोलकाता में टी बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन को लिखे एक पत्र में दार्जिलिंग टी एसोसिएशन ने यह चिंता जताई है। पत्र में कहा गया है कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के एक निर्देश में सरकारी तेल विपणन कंपनियों से कहा गया है कि वे अपनी खरीदी हुई एलपीजी केवल घरेलू उपयोग के लिए ही आपूर्ति और विपणन करें।

चाय उद्योग के प्रतिनिधियों को आशंका है कि यदि यह निर्देश लागू हुआ तो चाय बागानों के कारखानों के लिए उद्योग में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी मिलना मुश्किल हो सकता है। इसका सीधा असर दार्जिलिंग चाय के उत्पादन पर पड़ेगा। इससे लगभग 55 हजार स्थायी श्रमिक और उनके परिवार मुश्किल में पड़ सकते हैं।

पत्र में एसोसिएशन ने अनुरोध किया है कि संबंधित मंत्रालय से बात करके दार्जिलिंग चाय उद्योग के कारखानों में औद्योगिक एलपीजी की आपूर्ति निर्बाध रखी जाए।

पिछले एक दशक में दार्जिलिंग के अधिकांश चाय बागानों के कारखाने कोयले की जगह औद्योगिक एलपीजी के इस्तेमाल की ओर झुक गए हैं। इसलिए गैस आपूर्ति में बाधा आने पर उत्पादन प्रक्रिया ही ठप पड़ने की आशंका है।

दार्जिलिंग का चाय उद्योग लंबे समय से उत्पादन संकट से जूझ रहा है। 1990 में जहां उत्पादन लगभग 1 करोड़ 40 लाख किलोग्राम था, वह हाल के समय में घटकर 60 लाख किलोग्राम से भी नीचे आ गया है। 2024 और 2025 में उत्पादन और घटकर नए ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया।

2025 के जनवरी से नवंबर तक के उत्पादन के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर देखा गया कि 2024 की इसी अवधि की तुलना में उत्पादन और 8.79 प्रतिशत कम हुआ है।

उद्योग के सामने कुछ और संरचनात्मक समस्याएं भी हैं। उद्योग सूत्रों के अनुसार नेपाल से तुलनात्मक रूप से सस्ती चाय भारतीय बाजार में आ रही है, जिसकी गुणवत्ता कई मामलों में दार्जिलिंग चाय जैसी ही है। इससे दार्जिलिंग चाय की कीमतों में ठहराव आ गया है।

विश्लेषकों के मुताबिक चाय बागानों में पुराने पौधों की जगह नए पौधे लगाने का काम पर्याप्त नहीं हुआ है। इसके कारण बागानों की उत्पादन क्षमता धीरे-धीरे कम होती जा रही है।

ऐसे में यदि औद्योगिक एलपीजी की आपूर्ति में समस्या पैदा होती है, खासकर फर्स्ट फ्लश के समय, तो स्थिति और जटिल हो सकती है। क्योंकि फर्स्ट फ्लश की दार्जिलिंग चाय अंतरराष्ट्रीय बाजार में सबसे अधिक कीमत पाती है और इसका अधिकांश हिस्सा निर्यात किया जाता है।

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