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भारत में मेट्रो नेटवर्क विस्तार: 10 वर्षों में चार गुना वृद्धि, शहरी जीवन और अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ

वर्ष 2013-14 में मेट्रो बजट 5 हजार 798 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 29 हजार 550 करोड़ रुपये हो गया है।

By राखी मल्लिक

Mar 15, 2026 17:44 IST

नई दिल्ली : पिछले एक दशक में भारत के मेट्रो रेल नेटवर्क में तेजी से विस्तार हुआ है। यह शहरी बुनियादी ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है और इससे आर्थिक तथा सामाजिक स्तर पर भी बड़े लाभ मिल रहे हैं। हाल ही में सरकार द्वारा किए गए एक विश्लेषण में बताया गया है कि देश आधुनिक सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में लगातार निवेश बढ़ा रहा है।

2014 में भारत में मेट्रो नेटवर्क की कुल लंबाई लगभग 248 किलोमीटर थी, जो 2025 तक बढ़कर करीब 1,095 किलोमीटर हो गई है। यह वृद्धि शहरी परिवहन ढांचे के तेज विकास को दर्शाती है। इसके साथ ही मेट्रो सेवाएं भी तेजी से फैल रही हैं। 2014 में जहां केवल 5 शहरों में मेट्रो चलती थी, वहीं 2025 तक यह संख्या बढ़कर 26 शहरों तक पहुंच गई है।

इस विस्तार के कारण भारत अब दुनिया के सबसे बड़े मेट्रो रेल नेटवर्क वाले देशों में शामिल हो गया है। देश के प्रमुख महानगरों जैसे दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, हैदराबाद, चेन्नई, लखनऊ, पुणे और अहमदाबाद में मेट्रो सेवाएं चल रही हैं। इससे लोगों के आने-जाने के तरीके में बड़ा बदलाव आया है और उन्हें तेज, भरोसेमंद तथा पर्यावरण के अनुकूल परिवहन विकल्प मिल रहे हैं।

सरकार द्वारा मेट्रो परियोजनाओं पर खर्च भी काफी बढ़ा है। वर्ष 2013-14 में मेट्रो बजट 5 हजार 798 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 29 हजार 550 करोड़ रुपये हो गया है। यानी शहरी परिवहन प्रणाली के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए बजट में पांच गुना से अधिक वृद्धि हुई है।

यह निवेश देश के व्यापक बुनियादी ढांचा कार्यक्रमों के अनुरूप है। जिनका उद्देश्य कनेक्टिविटी बढ़ाना, आर्थिक विकास को गति देना और तेजी से बढ़ते शहरों में लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है। मेट्रो परियोजनाओं को प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान जैसे राष्ट्रीय ढांचा योजनाओं से भी जोड़ा जा रहा है, ताकि अन्य परिवहन नेटवर्क और शहरी विकास योजनाओं के साथ बेहतर समन्वय हो सके।

मेट्रो से केवल यातायात ही नहीं सुधरा है, बल्कि इसका असर लोगों की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ा है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की एक हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि मेट्रो कनेक्टिविटी से परिवारों की आर्थिक स्थिरता मजबूत होती है।

एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार शोध के अनुसार भारत में बुनियादी ढांचा विकास का स्वर्णिम दशक, मेट्रो रेल नेटवर्क के विशेष संदर्भ में जिन क्षेत्रों में मेट्रो सुविधा उपलब्ध है, वहां रहने वाले परिवारों में ऋण चुकाने की क्षमता बेहतर देखी गई है और आर्थिक तनाव कम हुआ है। इसका मुख्य कारण परिवहन खर्च में कमी और निजी वाहनों पर निर्भरता का घट जाना है।

अध्ययन में शहरों के आंकड़े भी सामने आए हैं। दिल्ली में गृह ऋण की किस्तें चूकाने के मामलों में 4.42% की कमी आई, जबकि समय से पहले ऋण चुकाने के मामलों में 1.38% की वृद्धि हुई। बेंगलुरु में भुगतान में देरी 2.4% कम हुई और समय से पहले भुगतान 3.5% बढ़ा।

वहीं हैदराबाद में बकाया भुगतान के मामलों में 1.7% की कमी और जल्दी भुगतान में 1.8% की वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार मेट्रो से यात्रा सस्ती होने के कारण लोगों का ईंधन, वाहन रखरखाव और समय पर खर्च कम होता है। इससे परिवार अपनी आय का बेहतर प्रबंधन कर पाते हैं और कर्ज का बोझ भी कम होता है।

इसका लाभ केवल परिवारों तक ही सीमित नहीं है। बेहतर ऋण भुगतान व्यवहार से बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए भी जोखिम कम होता है, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।

देश के कई शहरों में नई मेट्रो परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं और कई नई योजनाएं प्रस्तावित हैं। आने वाले वर्षों में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार शहरी परिवहन को और बेहतर बनाने में है तथा आगे भी यह आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और शहरों में रहने वाले लोगों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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