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रूस में नौकरी के नाम पर धोखा, 8 महीने बाद ताबूत में लौटा लुधियाना का लाल

रूस में नौकरी की तलाश में गए लुधियाना के 21 वर्षीय समरजीत सिंह की यूक्रेन युद्ध में जबरन रूसी सेना में भेजे जाने के बाद मौत हो गई, जिससे परिवार शोक और सवालों में डूब गया।

By प्रियंका कानू

Mar 15, 2026 17:36 IST

लुधियाना: पंजाब, हरियाणा, जम्मू समेत कई राज्यों के युवकों को कथित तौर पर एजेंटों द्वारा धोखे से रूसी सेना में भर्ती कर यूक्रेन युद्ध के मोर्चे पर भेजे जाने के मामले सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में पंजाब के लुधियाना के 21 वर्षीय युवक समरजीत सिंह की मौत की खबर ने परिवार और पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिवार का आरोप है कि समरजीत सिंह नौकरी की तलाश में रूस गए थे लेकिन वहां उन्हें जबरन रूसी सेना में शामिल कर लिया गया और यूक्रेन युद्ध के मोर्चे पर भेज दिया गया।

लुधियाना के डाबा इलाके के अमरपुरी के रहने वाले समरजीत सिंह जुलाई 2025 में रूस गए थे। उनका सपना था कि विदेश में काम करके पैसे कमाएंगे और आर्थिक तंगी से जूझ रहे अपने परिवार की मदद करेंगे लेकिन परिजनों के अनुसार एजेंटों ने उन्हें अच्छी नौकरी का झांसा देकर धोखा दिया। रूस पहुंचने के बाद उन्हें बिना किसी सैन्य प्रशिक्षण के सीधे सेना में भर्ती कर लिया गया और युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया। परिवार का कहना है कि समरजीत ने सितंबर 2025 में आखिरी बार उनसे बात की थी। 8 अक्टूबर, 2025 को वह युद्ध क्षेत्र से लापता हो गए। महीनों तक परिवार को उनके बारे में कोई खबर नहीं मिली।

गुरुवार को समरजीत का पार्थिव शरीर नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पहुंचा। वहां से उसे लुधियाना लाया गया, जहां शुक्रवार को गमगीन माहौल में परिवार ने उनका अंतिम संस्कार किया। अपने बेटे की चिता के पास खड़े पिता चरणजीत सिंह की आंखों से आंसू रुक नहीं रहे थे। उन्होंने लोगों से भावुक अपील करते हुए कहा कि कोई भी परिवार एजेंटों के झूठे वादों के झांसे में आकर अपने बच्चों को विदेश न भेजे।

चरणजीत सिंह अमरपुरी इलाके में एक छोटी सी किराने की दुकान चलाते हैं। उन्होंने बताया कि बेटे के लापता होने के बाद परिवार महीनों तक मदद के लिए दर-दर भटकता रहा। उन्होंने कहा, “हमने हर दरवाजा खटखटाया। केंद्रीय नेताओं से लेकर राज्य के मंत्रियों और स्थानीय विधायकों तक से मदद मांगी लेकिन किसी ने हमारी मदद नहीं की।”

कुछ महीने पहले सोशल मीडिया पर समरजीत का एक वीडियो भी सामने आया था। उस वीडियो में वह अन्य भारतीय युवकों के साथ दिखाई दे रहे थे। उन्होंने वहां से मदद की गुहार लगाते हुए कहा था कि उन्हें बिना किसी प्रशिक्षण के युद्ध के मोर्चे पर भेजा जा रहा है।

पिता ने भारी मन से कहा कि उनका बेटा केवल परिवार की मदद करने के लिए विदेश गया था। उन्होंने कहा, “अगर हमारे देश में उसे काम मिल जाता, तो वह कभी विदेश नहीं जाता।" पिता की यह बात अपने आप में कितना दुखद और निराशाजनक है।

परिवार का यह भी आरोप है कि अब तक न तो रूसी अधिकारियों और न ही भारत या पंजाब सरकार की ओर से किसी ने उनसे संपर्क किया है। उन्हें न तो किसी मुआवजे की जानकारी दी गई और न ही यह बताया गया कि समरजीत की मौत किन परिस्थितियों में हुई। टूटे हुए दिल से पिता ने कहा, “हमें यह तक नहीं पता कि मेरे बेटे के साथ उसके आखिरी पल में क्या हुआ। हमारे पास एक शव तो आया है लेकिन हम यह भी पूरी तरह नहीं कह सकते कि वह सच में हमारे बेटे का ही है।”

यह घटना केवल एक परिवार का दर्द नहीं बल्कि उन सैकड़ों युवाओं के सपनों और जोखिम की कहानी भी है, जो बेहतर भविष्य की उम्मीद में विदेश जाते हैं और कई बार धोखे का शिकार हो जाते हैं।

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