भुवनेश्वरः ओडिशा में राज्यसभा की चार सीटों के लिए 16 मार्च को होने वाले चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस चुनाव में जहां तीन सीटों का गणित लगभग साफ माना जा रहा है, वहीं चौथी सीट को लेकर सियासी मुकाबला रोचक बन गया है। इसी वजह से सभी दल अपने विधायकों को एकजुट रखने और क्रॉस-वोटिंग रोकने के लिए अलग-अलग रणनीतियां अपना रहे हैं।
भाजपा ने इसी रणनीति के तहत अपने सभी विधायकों और मंत्रियों को पारादीप के एक लग्जरी होटल में ठहराया है। 15 मार्च की रात भुवनेश्वर से करीब 77 विधायक और मंत्री तीन लग्जरी बसों में पारादीप पहुंचे। वे पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय के होटल में ठहरे हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि यहां विधायकों को मतदान प्रक्रिया की जानकारी और प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि वोट डालते समय कोई गलती न हो और क्रॉस-वोटिंग की संभावना भी खत्म की जा सके।
भाजपा के नेताओं का दावा है कि पार्टी इस चुनाव में तीन सीटें जीतने की स्थिति में है। राज्य के खाद्य मंत्री के.सी. पात्रा और कानून मंत्री पृथ्वीराज हरचंदन ने कहा कि पार्टी पूरी तरह आश्वस्त है और विधायकों को मतदान की प्रक्रिया समझाई जा रही है ताकि कोई तकनीकी त्रुटि न हो।
विधानसभा के मौजूदा गणित पर नजर डालें तो कुल 147 सदस्यों वाली ओडिशा विधानसभा में भाजपा के पास 78 विधायक हैं। बीजद के 51 और कांग्रेस के 14 विधायक हैं, जबकि कुछ सीटें अन्य दलों और निर्दलीयों के पास हैं। भाजपा को तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी प्राप्त है, जिससे उसकी प्रभावी ताकत करीब 81 से 82 वोट तक पहुंच जाती है।
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए लगभग 30 प्राथमिक वोटों की जरूरत होती है। इस हिसाब से भाजपा दो सीटें आसानी से जीत सकती है, जबकि बीजद की एक सीट लगभग तय मानी जा रही है। असली मुकाबला चौथी सीट को लेकर है, जहां राजनीतिक समीकरण निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
इस चुनाव में भाजपा ने अपने प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और वर्तमान सांसद सुजीत कुमार को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा पार्टी ने निर्दलीय उम्मीदवार और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय को समर्थन दिया है। दूसरी ओर बीजद ने संतरूप्त मिश्रा और प्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट डॉ. दत्तेश्वर होता को उम्मीदवार बनाया है। डॉ. होता को कांग्रेस और सीपीआई(एम) का समर्थन प्राप्त है।
बीजद भी अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए सक्रिय है। पार्टी अध्यक्ष नवीन पटनायक ने शनिवार शाम विधायकों की एक अहम बैठक बुलाई और सभी को पार्टी लाइन के अनुसार मतदान करने के निर्देश दिए। पार्टी ने व्हिप भी जारी किया है ताकि कोई विधायक बागी रुख न अपनाए।
कांग्रेस के भीतर हालांकि कुछ असमंजस की स्थिति दिखाई दे रही है। मोहाना के विधायक दशरथी गोमांगो के संपर्क में न होने की खबरों ने अटकलों को जन्म दिया है। वहीं बारबाटी-कटक से विधायक सोफिया फिरदौस ने बीजद उम्मीदवार डॉ. होता को समर्थन देने के फैसले पर असहमति जताई है। उनका कहना है कि यह फैसला कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदेह हो सकता है।
सीपीआई(एम) के विधायक लक्ष्मण मुंडा ने हालांकि स्पष्ट कर दिया है कि वे पार्टी के निर्णय के अनुसार डॉ. होता के पक्ष में मतदान करेंगे। ऐसे में चौथी सीट के लिए मुख्य मुकाबला दिलीप राय और डॉ. दत्तेश्वर होता के बीच माना जा रहा है।
ओडिशा में लगभग 12 वर्षों बाद राज्यसभा चुनाव में ऐसा सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है। जिन चार सीटों के लिए मतदान हो रहा है, वे 2 अप्रैल को खाली हो रही हैं, जिनमें दो सीटें भाजपा और दो बीजद के पास थीं।
मतदान 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक ओडिशा विधानसभा में होगा और मतगणना भी उसी दिन शाम को की जाएगी। भाजपा राज्य में सत्ता में आने के बाद पहली बार इतने मजबूत समीकरण के साथ मैदान में है और तीन सीटें जीतकर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाना चाहती है। वहीं विपक्ष की कोशिश है कि चौथी सीट जीतकर भाजपा की बढ़त को सीमित किया जाए।
अब सबकी नजर चुनाव परिणाम पर है, जो यह तय करेगा कि राज्य की राजनीति में किस दल की रणनीति ज्यादा कारगर साबित होती है।