लखनऊ : छोटी जंगली बिल्लियों के संरक्षण को मजबूत बनाने के लिए भारत, नेपाल और भूटान के वन अधिकारी, पर्यावरण वैज्ञानिक और वन्यजीव विशेषज्ञ एक साझा नेटवर्क बनाने पर सहमत हुए हैं। यह निर्णय दुधवा टाइगर रिजर्व में आयोजित तीसरी अंतरराष्ट्रीय सीमापार बैठक के समापन सत्र में लिया गया।
वन विभाग के अधिकारियों ने रविवार को बताया कि दो दिवसीय यह बैठक ग्लोबल टाइगर फोरम के जीईएफ-7 कार्यक्रम के तहत आयोजित की गई थी जिसका समापन शुक्रवार को हुआ। बैठक में तीनों देशों के विशेषज्ञों ने छोटी जंगली बिल्लियों के संरक्षण के लिए संयुक्त रणनीति तैयार करने पर सहमति जताई।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. एच. राजामोहन ने बताया कि छोटे मांसाहारी जीव, खासकर छोटी जंगली बिल्लियां, पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये छोटे स्तनधारियों और चूहों की आबादी को नियंत्रित कर पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैं।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नेटवर्क क्षेत्र में मौजूद छोटी जंगली बिल्ली प्रजातियों की स्थिति का आकलन करेगा। साथ ही इनके वितरण, आवास और संरक्षण से जुड़े खतरों पर वैज्ञानिक अध्ययन को बढ़ावा देगा।
बैठक के दौरान डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया ने “एन आइडेंटिफिकेशन मैनुअल फॉर वाइल्ड कैट्स इन दुधवा लैंडस्केप” नामक पुस्तक भी जारी की। यह पुस्तक वन अधिकारियों, शोधकर्ताओं और संरक्षण विशेषज्ञों के लिए फील्ड गाइड का काम करेगी।
ग्लोबल टाइगर फोरम के सचिव डॉ. राजेश गोपाल ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य दक्षिण एशिया में छोटी जंगली बिल्लियों के संरक्षण को मजबूत करना और वैश्विक स्तर पर संरक्षण क्षमताओं को बढ़ाना है।
इस बैठक में वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो सहित कई संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ भी शामिल हुए।