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LPG के विकल्प के रूप में केरोसिन का उत्पादन बढ़ाया जा रहा है,’ बोले पीयूष गोयल, संकट कितना गंभीर है?

सत्तर, अस्सी और नब्बे के दशकों तक खाना स्टोव में बनाया जाता था। शाम होते ही मां-दादी देखती थीं कि केरोसिन पर्याप्त है या नहीं।

नई दिल्ली : वो नब्बे के दशक की बात है। शाम होते ही हरिकेन, चिमनी का शीशा मां-दादी साफ करती थीं। यह भी देखती थीं कि स्टोव में पर्याप्त केरोसिन है या नहीं। ठीक-ठीक काटकर नमक भी तैयार रखती थीं।

LPG सिलेंडर संकट के माहौल में क्या फिर वही दिन लौटने वाले हैं? शनिवार को CNBC-TV18 के एक कार्यक्रम में केंद्रीय उद्योग और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की एक टिप्पणी में कई लोग इसी तरह का संकेत देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सरकार विकल्प ईंधन के रूप में केरोसिन का उत्पादन बढ़ा रहा है।

LPG सिलेंडर को लेकर जो चिंता है, शनिवार को केंद्र ने उसे स्वीकार कर लिया। गैस की कमी और हाहाकार लगातार बढ़ रहा है। इस स्थिति में विकल्प ईंधन के रूप में केरोसिन उत्पादन बढ़ाने की जानकारी केंद्रीय उद्योग और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने दी। साथ ही उन्होंने बताया कि गैस और पेट्रोल-डीजल पर्याप्त मात्रा में मौजूद है।

आस्सी और नब्बे के दशक में LPG सिलेंडर का प्रचार-प्रसार उस समय नहीं हुआ था। कोयले के साथ-साथ उस समय केरोसिन ही एकमात्र भरोसा था। कई परिवारों में केरोसिन स्टोव में खाना बनता था। केंद्र सरकार राशन में केरोसिन पर सब्सिडी भी देती थी। लेकिन बाजार में व्यापक रूप से LPG शुरू होने के बाद से केरोसिन का उपयोग धीरे-धीरे घटने लगा। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने सब्सिडी भी कम करनी शुरू कर दी। उत्पादन और उपयोग की दर नीचे जाकर थम गई। अब रसोईघरों से केरोसिन लगभग गायब हो चुका है।

विश्लेषकों के एक हिस्से के अनुसार, केरोसिन का उत्पादन बढ़ाकर वास्तव में LPG सिलेंडर पर दबाव कम करने की कोशिश की जा रही है। स्थिति ऐसी है कि एक महीने के लिए होटल और रेस्टोरेंट में बायोमास, RDF पेलेट, केरोसिन और कोयला उपयोग की अनुमति भी केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने दी है।

लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि केरोसिन को फिर से शुरु करना इतना आसान नहीं होगा। India Energy Statistics 2025 के आंकड़ों के अनुसार 2017-18 से 2023-24 के बीच केरोसिन का उत्पादन 83 प्रतिशत घट गया है।

6 मिलियन मीट्रिक टन से यह घटकर केवल 1 मिलियन मीट्रिक टन रह गया। 2017 में घरेलू उपयोग में 5.30 मिलियन मीट्रिक टन केरोसिन इस्तेमाल होता था, जो 2024 में घटकर केवल 0.30 मिलियन मीट्रिक टन रह गया। यानी एक झटके में 94 प्रतिशत कम हो गया।

हालांकि आशा की बात यह है कि हॉर्मुज में भारत के झंडावाहक जहाजों को ‘सेफ पासेज’ देने की घोषणा ईरान ने की है। इससे संकट कुछ हद तक कम होगा, ऐसा जानकारों का मानना है।

शनिवार सुबह ही दो भारतीय जहाज हॉर्मुज पार कर गए। 16 से 17 मार्च के बीच ये गुजरात के बंदरगाह पर पहुंचेंगे। इन दोनों जहाजों में कुल 92,700 टन LPG है। हालांकि अभी भी हॉर्मुज में भारत के 24 गैस लदे जहाज फंसे हुए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से आश्वासन दिया गया है कि घरेलू LPG को लेकर कोई घबराहट नहीं है। अस्पतालों और स्कूल-कॉलेजों में भी नियमित सिलेंडर की डिलीवरी दी जा रही है।

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