चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी है। राज्य में 2 चरणों में चुनाव होंगे। पहले चरण का चुनाव 23 अप्रैल को होगा और दूसरे चरण का चुनाव 29 अप्रैल को होगा। पहले चरण में 152 सीटों पर चुनाव होगा और दूसरे चरण में 142 सीटों पर चुनाव करवाया जाएगा। मतगणना 4 मई को होगी। रविवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में चुनाव की घोषणा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने की।
इस घोषणा के साथ ही राज्य में मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट यानी आदर्श आचार संहिता लागू कर दी गयी है। इसका मतलब है कि राज्य सरकार अब कोई भी नैतिक फैसला नहीं ले सकेगी। चुनाव की घोषणा होने के साथ-साथ राज्य का प्रशासन चुनाव आयोग के अधीनस्थ चला गया।
70वें पश्चिम बंगाल विधानसभा की मियाद 7 मई 2026 को खत्म हो रही है। इसलिए उससे पहले ही सरकार का गठन कर लेना होगा। साल 2021 में 8 चरणों में चुनाव करवाए गए थे। उस समय 2 मार्च को पहले चरण और 29 अप्रैल को अंतिम चरण का मतदान हुआ था। साल 2024 में लोकसभा चुनाव भी 7 चरणों में ही करवाया गया था। सिर्फ बंगाल नहीं बल्कि लोकसभा चुनाव देशभर में 7 चरणों में हुआ था और सर्वाधिक चरणों में बंगाल में ही चुनाव हुए थे।
SIR की वजह से इस बार चुनाव की घोषणा देर से ही की जा रही है। इस बार के विधानसभा चुनाव के चरणों को भी कम किया गया है। हालांकि भाजपा, कांग्रेस और सीपीएम समेत अन्य विपक्षी पार्टियों ने 2 अथवा अधिकतम 3 चरणों में चुनाव करवाने की मांग की थी। हालांकि तृणमूल ने चुनाव के चरणों के बारे में कोई खुलासा नहीं किया था। तृणमूल ने हर बार एक ही मांग उठायी है कि एक भी मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटना चाहिए।
साल 2011 में 34 सालों से राज्य में सत्ता की बागडोर संभाल रही वामपंथी सरकार को हटाकर पहली बार ममता बनर्जी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठी थी। इसके बाद 2016 और 2021 के विधानसभा चुनाव में भी भारी बहुमत से ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने फिर से राज्य में जीत दर्ज की।
इस बार के चुनाव में अपनी जीत को लेकर एक ओर जहां भाजपा पूरी तरह से आश्वस्त है वहीं तृणमूल कांग्रेस अपनी विरोधी पार्टी को एक इंच जमीन भी नहीं छोड़ना चाहती है। दूसरी ओर राज्य की 294 सीटों पर ही कांग्रेस ने उम्मीदवारों को उतारने की बात कही है। सीपीएम कौन सी रणनीति के साथ बंगाल विधानसभा चुनाव में उतरेगा, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है।
आखिरकार सत्ता की बागडोर किस पार्टी के साथ में जाती है या फिर इस बागडोर को पकड़ने के लिए किसी पार्टी को आपसी समझौते के साथ गठबंधन का रास्ता चुनना पड़ेगा - यह तो आने वाला समय ही तय करेगा!