कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा से पहले राज्य में राजनीतिक माहौल तेज होता जा रहा है। ऐसे ही दौर में तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, राज्य मंत्री और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने रविवार को कोलकाता के भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत की। यह वही सीट है, जिसका प्रतिनिधित्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी करती हैं।
फिरहाद हकीम ने चुनावी प्रचार के दौरान भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यदि भाजपा राज्य की सत्ता में आती है तो बंगाली समुदाय पर दबाव बढ़ेगा। सिर्फ इतना ही नहीं राज्य के संसाधनों को लूटा जाएगा। उन्होंने दावा किया कि बंगाल की पहचान और अस्तित्व को बचाने के लिए लोगों को एकजुट होकर तृणमूल कांग्रेस का समर्थन करना होगा।
हकीम ने कहा कि भाजपा यहां लोगों को दबाने और राज्य को लूटने के इरादे से आ रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि सभी को एकजुट होकर ममता बनर्जी को फिर से मुख्यमंत्री बनाना होगा, क्योंकि आज बंगाल के अस्तित्व की लड़ाई लड़ी जा रही है।
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा में मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच माना जा रहा है। ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस वर्ष 2011 से लगातार राज्य की सत्ता में बनी हुई है।
पिछले दो विधानसभा चुनावों के आंकड़े राज्य की राजनीति में बदलते समीकरणों की ओर संकेत करते हैं। वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव में राज्य में 82.2 प्रतिशत मतदान हुआ था। उस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 294 में से 211 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था और उसका मत प्रतिशत 45.6 रहा था। उस समय कांग्रेस को 44 और माकपा को 26 सीटें मिली थीं। भाजपा को उस चुनाव में केवल तीन सीटों से संतोष करना पड़ा था, हालांकि उसका वोट प्रतिशत 10.3 रहा था।
इसके बाद 2021 के विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़कर 84.7 हो गया। इस चुनाव में भी तृणमूल कांग्रेस ने सत्ता बरकरार रखी और 213 सीटें जीतकर सरकार बनाई। पार्टी का मत प्रतिशत बढ़कर 48.5 हो गया। दूसरी ओर भाजपा ने बड़ी छलांग लगाते हुए तीन सीटों से बढ़कर 77 सीटें जीत लीं और उसका वोट प्रतिशत 38.5 तक पहुंच गया। वहीं कांग्रेस का प्रदर्शन काफी कमजोर रहा और उसे केवल एक सीट मिली, जबकि उसका वोट प्रतिशत 1.6 रहा।
इस बार के विधानसभा चुनाव में भी तृणमूल कांग्रेस अपने मजबूत गढ़ को बचाए रखने की पूरी कोशिश करेगी। वहीं भाजपा पिछले चुनाव में मिली बढ़त को आगे बढ़ाते हुए सत्ता तक पहुंचने का लक्ष्य लेकर मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। चुनाव आयोग द्वारा जल्द ही चुनाव कार्यक्रम की घोषणा किए जाने की संभावना है।