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आरएन रवि ने पश्चिम बंगाल के 22वें राज्यपाल पद की शपथ ली, विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल

पूर्व IPS अधिकारी ने राज्यपाल पद की शपथ ली। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और वरिष्ठ अधिकारी समारोह में उपस्थित।

By श्वेता सिंह

Mar 12, 2026 14:25 IST

कोलकाताः पूर्व आईपीएस आरएन रवि ने आज पश्चिम बंगाल के 22वें राज्यपाल के रूप में शपथ ले ली है। आर एन रवि भारतीय पुलिस सेवा और सीबीआई में भी काम कर चुके हैं। कोलकाता के लोक भवन में आयोजित एक भव्य और औपचारिक समारोह में आज वृहस्पतिवार को आर.एन. रवि ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। कोलकाता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पाल ने उन्हें शपथ दिलाई। समारोह सुबह लगभग 11:30 बजे शुरू हुआ और राज्य प्रशासन के उच्च अधिकारियों, राजनीतिक हस्तियों और मीडिया कर्मियों की मौजूदगी में संपन्न हुआ।

इस शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, विधानसभा अध्यक्ष बिमान बोस, राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। शपथ ग्रहण के बाद राज्यपाल ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से शिष्टाचार भेंट की। दोनों लोगों ने एक-दूसरे का अभिवादन किया और संक्षिप्त बातचीत भी की।

नये राज्यपाल की नियुक्ति

आर.एन. रवि की नियुक्ति 6 मार्च 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा की गई। वे पूर्व राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस की जगह ले रहे हैं जिन्होंने 5 मार्च को अचानक इस्तीफा दे दिया था। इस अचानक बदलाव ने राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य से सलाह लिए बिना यह निर्णय लिया, जो परंपरा के खिलाफ है।

आरएन रवि 11 मार्च को कोलकाता पहुंचे और अगले दिन शपथ ग्रहण किया। यह बदलाव 2026 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले होने के कारण राज्य की राजनीति में विशेष महत्व रखता है। राजनीतिक विशेषज्ञ इसे राज्य और केंद्र के बीच संतुलन को प्रभावित करने वाली रणनीति के रूप में देख रहे हैं।

नये राज्यपाल का करियर और तजुर्बा

आर.एन. रवि का जन्म 3 अप्रैल 1952 को हुआ। वे 1976 बैच के केरल कैडर के सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी हैं। अपने करियर के दौरान उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और केंद्र की खुफिया एजेंसियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। इसके अलावा वे उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में भी कार्यरत रह चुके हैं।

राज्यपाल बनने से पहले रवि 2019 से 2021 तक नागालैंड के राज्यपाल और 2021 से मार्च 2026 तक तमिलनाडु के राज्यपाल रहे। तमिलनाडु में उनके कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के साथ कई मामलों में मतभेद चर्चा में रहे। रवि प्रशासन में लोगों के हितों के लिए काम करने के लिए जाने जाते हैं और उन्होंने राजभवन को “लोक भवन” के रूप में अधिक सुलभ बनाने का प्रयास किया।

नये राज्यपाल की नियुक्ति का महत्व

पश्चिम बंगाल के नए राज्यपाल के रूप में आर.एन. रवि की नियुक्ति राज्य प्रशासन और राजनीति में नया अध्याय खोल रही है। विधानसभा चुनाव के नजदीक होने के कारण यह बदलाव और भी महत्वपूर्ण हो गया है।

राज्यपाल की भूमिका संवैधानिक होने के बावजूद राजनीतिक संतुलन बनाए रखने में अहम होती है। उम्मीद की जा रही है कि रवि राज्य के विकास, कानून-व्यवस्था और केंद्र-राज्य संबंधों में संतुलन बनाए रखेंगे। उनका अनुभव और प्रशासनिक दृष्टिकोण राज्य में सभी पक्षों के साथ सकारात्मक और संतुलित रुख अपनाने में मदद कर सकता है।

जनता और राजनीतिक दलों की नजरें

राज्यवासियों और राजनीतिक दलों की नजरें अब नए राज्यपाल पर टिकी हैं। उनके पिछले अनुभवों और प्रशासनिक दृष्टिकोण को देखते हुए यह उम्मीद जताई जा रही है कि वे सभी पक्षों के साथ संवाद और संतुलन बनाए रखते हुए राज्य प्रशासन में सहयोग करेंगे।

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