नई दिल्ली: अमेरिका और इज़राइल के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान द्वारा हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को आंशिक रूप से अवरुद्ध किए जाने के बाद भारत अपने लगभग 28 भारतीय झंडे वाले व्यापारी जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ईरान के संपर्क में है। इस मामले से जुड़े लोगों ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
विदेश मंत्रियों के बीच हुई बातचीत: विदेश मंत्रालय के अनुसार मंगलवार को भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष के बीच हुई बातचीत में समुद्री जहाजों की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
चार–पांच दिनों से भारतीय जहाजों को अनुमति नहीं: जानकारी के अनुसार पिछले चार–पांच दिनों से ईरान ने किसी भी भारतीय झंडे वाले व्यावसायिक टैंकर को हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति नहीं दी है।
28 भारतीय जहाज प्रभावित: जहाजरानी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक फिलहाल 24 भारतीय झंडे वाले जहाज हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के पश्चिम में मौजूद हैं। उन पर 677 भारतीय नाविक सवार हैं। चार जहाज इस जलमार्ग के पूर्व में खड़े हैं, जिन पर 101 भारतीय नाविक हैं।
MEA की प्रतिक्रिया: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कहा कि हाल के दिनों में भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच तीन बार बातचीत हुई है। आखिरी बातचीत में जहाजों की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन इससे अधिक कुछ कहना अभी जल्दबाज़ी होगी।
तेल और गैस की कीमतों में उछाल: ईरान द्वारा हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को लगभग बंद किए जाने के बाद वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में तेजी आई है। यह संकरा समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित है और दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी का परिवहन इसी रास्ते से होता है।
ईरान में करीब 9000 भारतीय: जायसवाल ने बताया कि इस समय ईरान में लगभग 9000 भारतीय नागरिक रह रहे हैं। इनमें छात्र, नाविक, व्यवसायी, पेशेवर और तीर्थयात्री शामिल हैं।
भारत कर रहा है मदद: भारत सरकार उन भारतीयों की मदद कर रही है जो ईरान से अज़रबैजान और आर्मेनिया के रास्ते भारत लौटना चाहते हैं। इसके लिए उन्हें वीज़ा और सीमा पार करने में सहायता दी जा रही है।
कुछ लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया: भारत पहले ही तेहरान से कई भारतीय नागरिकों, जिनमें छात्र और तीर्थयात्री शामिल हैं, को ईरान के अन्य सुरक्षित शहरों में स्थानांतरित कर चुका है।
भारतीयों से एडवाइजरी मानने की अपील: विदेश मंत्रालय ने ईरान छोड़ने के इच्छुक भारतीय नागरिकों से भारतीय दूतावास द्वारा जारी सलाह का पालन करने की अपील की है।
प्रधानमंत्री की खाड़ी देशों के नेताओं से बातचीत: प्रवक्ता ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में खाड़ी क्षेत्र के कई नेताओं से फोन पर बातचीत की है। इन वार्ताओं में उन्होंने संवाद और कूटनीति के जरिए जल्द शांति स्थापित करने पर जोर दिया तथा नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही।
भारतीय समुदाय की सुरक्षा अहम: जायसवाल ने कहा कि खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं और उनकी सुरक्षा और कल्याण भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध का असर दुनिया के कई देशों और लोगों के जीवन पर पड़ रहा है और इस संघर्ष के परिणाम सभी देख रहे हैं।