पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण गैस की आपूर्ति को लेकर परेशानी बढ़ रही है और इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। इस क्षेत्र में जारी युद्ध का सबसे अधिक असर ऊर्जा आपूर्ति पर देखा जा रहा है। कई देशों में एलपीजी गैस की आपूर्ति अनिश्चित हो गई है और गैस की कीमतें बढ़ रही हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं है। भारत के लिए भले ही हर्मुज जल मार्ग खुला हुआ हो, फिर भी गैस की आपूर्ति पर दबाव पड़ रहा है।
गैस न मिलने के कारण कई होटल और रेस्टोरेंट बंद करना पड़ रहा है। इस स्थिति में वैकल्पिक रसोई के साधन के रूप में इंडक्शन कुकर का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। क्या आप भी इस रास्ते पर हैं? अगर हां, तो इस विषय में यह जानकारी आपके लिए महत्वपूर्ण है।
रसोई में उपयोग किए जाने वाले इंडक्शन कुकर को लेकर कई लोगों के मन में सवाल और भ्रांतियां हैं। इनमें से कुछ सही हैं और कुछ गलत धारणाएं भी हैं। वे बातें हैं :
बिजली का बिल बढ़ता है?
कई लोगों का मानना है कि इंडक्शन कुकर इस्तेमाल करने से बिजली का बिल बहुत बढ़ जाता है। लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। इंडक्शन कुकर सीधे ही बर्तन के तले में गर्मी पैदा करता है, जिससे अतिरिक्त ईंधन बर्बाद नहीं होता। इसलिए यह अक्सर गैस की तुलना में भी अधिक किफायती हो सकता है।
क्या विद्युत्-स्पर्श का खतरा रहता है?
एक और सामान्य धारणा यह है कि इंडक्शन कुकर इस्तेमाल करने से करंट लगने का खतरा रहता है। असल में कुकर का ऊपरी हिस्सा सामान्यतः सिरामिक या टेम्पर्ड ग्लास से बना होता है, जो बिजली का संचालन कम करता है। खाना पकाने के दौरान केवल बर्तन गर्म होता है, कुकर की सतह सीधे बिजली नहीं ले जाती। इसलिए शॉक लगने की संभावना बहुत कम है।
सभी बर्तन उपयुक्त नहीं हैं?
कई लोगों का मानना है कि सभी प्रकार के बर्तनों में इंडक्शन कुकर पर खाना नहीं बनता। इसमें आंशिक रूप से सच्चाई है। इंडक्शन कुकर पर खाना पकाने के लिए बर्तन का तला चुम्बकीय धातु का होना चाहिए, जैसे लोहे या स्टेनलेस स्टील का। हालांकि आजकल बाजार में अधिकांश कुकवेयर इंडक्शन फ्रेंडली होते हैं। इसलिए अपने घर के सामान्य स्टील के बर्तनों में आसानी से खाना बनाया जा सकता है।
खाना बनने में ज्यादा समय लगता है?
कुछ लोग सोचते हैं कि इंडक्शन कुकर पर खाना बनाने में ज्यादा समय लगता है। लेकिन यह गैस की तुलना में जल्दी पानी गर्म कर सकता है। क्योंकि गर्मी सीधे बर्तन में उत्पन्न होती है और ऊर्जा की बर्बादी कम होती है। इसलिए खाना तुलनात्मक रूप से जल्दी तैयार हो जाता है।
उपयोग जटिल है या स्वाद पर असर पड़ता है
कई लोगों का मानना है कि गैस की आग पर बने खाने का स्वाद अलग होता है और इंडक्शन कुकर में वही स्वाद नहीं मिलता। लेकिन खाना पकाने का स्वाद वास्तव में सामग्री और सही तापमान पर निर्भर करता है। इंडक्शन कुकर में तापमान को बहुत सूक्ष्म रूप से नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे कई बार खाना और भी परफेक्ट बन जाता है।
विस्फोट का खतरा है?
कुछ लोगों का मानना है कि इंडक्शन कुकर लंबे समय तक गर्म रहने पर विस्फोट का खतरा रहता है। असल में यह बर्तन हटाते ही कुकर की सतह जल्दी ठंडी हो जाती है। विस्फोट का खतरा लगभग नहीं के बराबर है। कई कुकरों में ऑटो शटडाउन और ओवरहीट प्रोटेक्शन की सुविधा भी होती है। इसलिए यह गैस की तुलना में अधिक सुरक्षित कहा जा सकता है।
पानी या सब्जी गिरने पर शॉक लग सकता है?
अगर इंडक्शन कुकर पर पानी या सब्जी गिर जाए, तो आमतौर पर शॉक लगने का खतरा बहुत कम होता है। क्योंकि अधिकांश इंडक्शन कुकर का ऊपरी हिस्सा गर्मी सहनशील ग्लास या सिरामिक से बना होता है, जो बिजली को सीधे नहीं पहुंचाता। लेकिन अत्यधिक मात्रा में पानी अंदर चली जाए तो सर्किट को नुकसान पहुंच सकता है और कुकर खराब हो सकता है। इसलिए खाना बनाते समय अगर तरल गिर जाए तो उसे तुरंत साफ करना और कुकर को सूखा रखना जरूरी है। थोड़ी बहुत मात्रा में पानी गिरने से कोई नुकसान नहीं होता।