क्या केवल उम्र बढ़ने के कारण ही बुढ़ापा आता है? मानसिक तनाव और शारीरिक समस्याएं भी इसके लिए उतनी ही जिम्मेदार होती हैं। और इन सबके पीछे आपके टॉक्सिक रिश्ते भी जिम्मेदार हो सकते हैं। आपके आसपास रहने वाले लोग भी आपको जल्दी बुढ़ापे की ओर ले जा सकते हैं। ऐसा एक नए शोध में सामने आया है।
समाज में ऐसे कई लोग होते हैं जो बहुत ही टॉक्सिक होते हैं। उनके साथ घुलना-मिलना आसान नहीं होता। वे हमेशा नकारात्मक बातें करते हैं और उसी तरह सोचते भी हैं। ऐसे लोगों के साथ रहने से आपके ऊपर भी मानसिक दबाव बनता है। उनसे बात करने के बाद आपके मन में भी नकारात्मक विचार आने लगते हैं। यही धीरे-धीरे बुढ़ापे को बुलावा देता है।
एक अंतरराष्ट्रीय शोध में ऐसा ही पाया गया है। यह शोध नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज की कार्यवाही में प्रकाशित हुआ है।
इस शोध में 2,600 से अधिक वयस्क लोगों पर एक सर्वे किया गया। इसमें उनके सोशल नेटवर्क के आंकड़ों और जैविक नमूनों का विश्लेषण किया गया। इससे पता चला कि जिन लोगों के जीवन में टॉक्सिक लोग अधिक होते हैं, वे दूसरों की तुलना में ज्यादा मानसिक तनाव में रहते हैं। यही तनाव उनके जीवन में जल्दी बुढ़ापा लेकर आता है।
शोध में भाग लेने वाले 10 लोगों में से लगभग 3 लोगों ने बताया कि उनके सामाजिक दायरे में कम से कम एक ऐसा व्यक्ति जरूर है जो बहुत टॉक्सिक है या मानसिक तनाव पैदा करता है। शोध में ऐसे लोगों को “हैसलर्स” कहा गया है, यानी ऐसे लोग जो लगातार दूसरों पर तनाव या दबाव डालते रहते हैं।
जैविक उम्र का आकलन करने के लिए शोधकर्ताओं ने लार के नमूने और डीएनए मिथाइलेशन पैटर्न का उपयोग किया। इस पद्धति को एपिजेनेटिक क्लॉक कहा जाता है। इससे यह पता लगाया जाता है कि शरीर कितनी तेजी से बूढ़ा हो रहा है।
शोध के अनुसार टॉक्सिक रिश्ते जैविक उम्र को लगभग 1.5 प्रतिशत तक बढ़ा सकते हैं। औसतन यह पाया गया कि जिन लोगों के जीवन में ऐसे रिश्ते हैं, वे अपनी वास्तविक उम्र से लगभग 9 महीने अधिक बूढ़े दिखाई देते हैं। यानी अगर किसी की उम्र 30 वर्ष है, तो उसका शरीर लगभग 30 वर्ष 9 महीने के बराबर हो जाता है।
शोध में यह भी सामने आया कि जो लोग टॉक्सिक रिश्तों में रहते हैं, उनमें हमेशा चिंता और अवसाद की भावना बनी रहती है। वे शारीरिक रूप से भी खुद को कम स्वस्थ महसूस करते हैं। यह तनाव कई बार सिरदर्द, अपच, नींद की समस्या, थकान और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसी समस्याएं पैदा करता है।
टॉक्सिक रिश्ते मन पर भारी दबाव डालते हैं। अगर आप लगातार नकारात्मक सोच वाले माहौल में रहते हैं, तो आपकी उम्र तेजी से बढ़ सकती है। सरल शब्दों में कहें तो जितना अधिक मानसिक तनाव होगा, उतनी ही तेजी से बुढ़ापा आएगा।
लंबे समय तक रहने वाला तनाव शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और फ्री रेडिकल्स को बढ़ा देता है। इससे कोशिकाएं तेजी से बूढ़ी होने लगती हैं। इसके अलावा मानसिक तनाव के कारण शरीर में कॉर्टिसोल, एपिनेफ्रिन और नॉरएपिनेफ्रिन जैसे तनाव हार्मोन का स्तर भी बढ़ जाता है। इससे शरीर में सूजन की स्थिति पैदा होती है और इंसुलिन रेजिस्टेंस तथा हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
स्वाभाविक रूप से कम उम्र में जितनी ज्यादा बीमारियां सामने आती हैं, उतनी ही जल्दी शरीर में बुढ़ापे के लक्षण दिखाई देने लगते हैं।