नई दिल्ली: रसोई गैस की कमी के कारण लगातार रेस्टोरेंट्स बंद हो रहे हैं। अगर समस्या अभी हल नहीं हुई, तो स्थिति और जटिल हो सकती है। रेस्टोरेंट्स बंद होने का असर ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर भी पड़ने लगा है। संकट की वजह से गिग वर्कर्स पर भी असर पड़ने की संभावना है।
रेस्टोरेंट उद्योग पर असर
युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बाधित होने से एलपीजी की आपूर्ति कम हो गई है। देशभर में लगभग 10,000 से अधिक रेस्टोरेंट और क्लाउड किचन अस्थायी रूप से बंद हैं। मेट्रो शहरों में फूड चेन (McDonald's या Domino's) अपने मेनू को घटाने पर मजबूर हैं। कोलकाता और चेन्नई जैसे शहरों में कई किचन लकड़ी या कोयला जलाकर खाना बना रहे हैं, जिससे ईंधन की कीमतें दोगुनी हो गई हैं।
Zomato-Swiggy की स्थिति
रेस्टोरेंट्स खाना नहीं बना पा रहे इसलिए डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर ऑर्डर लगभग 50-60% कम हो गए हैं। इस संकट के कारण Zomato और Swiggy के शेयर की कीमतों पर भी नकारात्मक असर पड़ा है।
गिग वर्कर्स पर प्रभाव
फूड डिलीवरी ऑर्डर्स के साथ गिग वर्कर्स की आय जुड़ी होती है। वे हर ऑर्डर के हिसाब से भुगतान पाते हैं। रेस्टोरेंट्स की गतिविधि कम होने पर उनकी आय भी सीधे कम हो जाती है। कई गिग वर्कर्स अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं। महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्रों—विशेषकर विदर्भ, मराठवाड़ा, कोल्हापुर और राज्य के अन्य हिस्सों में रहने वाले गिग वर्कर्स पहले से ही समस्याओं का सामना कर रहे हैं। पुणे, दिल्ली, बेंगलुरु जैसे कई शहरों में भी असर दिखने लगा है।
डिलीवरी बॉय परशुराम कांबले ने बताया, मेरे 12 घंटे के शिफ्ट में मैं दिन में लगभग 32 ऑर्डर डिलीवरी करता था। पिछले तीन दिनों में यह संख्या घटकर 13-15 हो गई है। मेरी दैनिक आय लगभग 1,600 रुपये से घटकर अब 600 रुपये के करीब रह गई है।
कोलकाता में प्रभाव
कोलकाता के कई प्रसिद्ध रेस्टोरेंट अस्थायी रूप से बंद हो सकते हैं। हालांकि फूड डिलीवरी ऑर्डर्स पर अभी बड़ा असर नहीं पड़ा है लेकिन अगर एलपीजी संकट जारी रहा, तो इसका असर गिग वर्कर्स पर भी पड़ेगा।