बेंगलुरुः कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने एलपीजी सिलेंडरों की कथित कमी को लेकर केंद्र सरकार और राज्य के भाजपा सांसदों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राज्य के भाजपा सांसदों को संसद में इस मुद्दे को उठाकर कर्नाटक के लोगों के लिए न्याय सुनिश्चित करना चाहिए।
बेंगलुरु के सदाशिवनगर स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए शिवकुमार ने कहा कि एलपीजी सिलेंडरों की कमी के कारण आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के भाजपा सांसद संसद में कई अन्य मुद्दों पर बोलते हैं, लेकिन एलपीजी की कमी जैसे गंभीर विषय पर चुप्पी साधे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि रसोई गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी भी लोगों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। शिवकुमार के मुताबिक, एलपीजी की कीमतें केंद्र सरकार तय करती है, इसलिए राज्य सरकार इस मामले में सीधे तौर पर कोई कदम नहीं उठा सकती।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार का इस मुद्दे पर रुख निराशाजनक है और उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि गैस की कमी से जनता को किसी तरह की असुविधा न हो। उन्होंने यह भी कहा कि स्थिति और खराब हो सकती है, क्योंकि एलपीजी पर चलने वाले ऑटो-रिक्शा भी कई जगह बंद हो चुके हैं।
इससे पहले मंगलवार को भी शिवकुमार ने व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की कमी को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि अगर गैस की आपूर्ति की समस्या जल्द हल नहीं हुई तो होटल, रेस्तरां और अस्पताल जैसे कई संस्थान प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि गैस की कमी के कारण देशभर में होटल और रेस्तरां अपने कामकाज बंद करने के लिए मजबूर हो सकते हैं। इसके साथ ही खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी हो सकती है।
बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत में शिवकुमार ने कहा कि अगर स्थिति ऐसी ही बनी रही तो लोगों को वैकल्पिक उपायों जैसे लकड़ी, इलेक्ट्रिक स्टोव या केरोसिन स्टोव का सहारा लेना पड़ सकता है।उन्होंने केंद्र सरकार पर इस मुद्दे को लेकर गंभीरता न दिखाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस विषय पर संसद में व्यापक चर्चा होनी चाहिए और सभी सांसदों की राय ली जानी चाहिए।
शिवकुमार की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण कई क्षेत्रों में व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की कमी की खबरें सामने आ रही हैं। इससे होटल मालिकों, रेस्तरां संचालकों और गैस पर निर्भर अन्य कारोबारियों में चिंता बढ़ गई है।