नई दिल्ली/ कोलकाता: देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की पहल पर तैयार किए गए महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस पर अब तक लोकसभा के 130 सांसदों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। संसदीय सूत्रों के अनुसार यह दावा किया गया है।
संसद के नियमों के मुताबिक लोकसभा में ऐसा नोटिस पेश करने के लिए कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। तृणमूल की पहल पर विपक्ष के लगभग 130 सांसदों ने बुधवार तक इस नोटिस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिससे राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी काफी आश्वस्त बताई जा रही है।
विपक्ष के कई वरिष्ठ सांसदों ने किया समर्थन
पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस नोटिस पर हस्ताक्षर करने वाले प्रमुख सांसदों में कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और गौरव गोगोई भी शामिल हैं। हालांकि संसदीय परंपरा के तहत लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस नोटिस पर हस्ताक्षर न करें, ऐसी संभावना जताई जा रही है। वहीं तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा नेता अभिषेक बनर्जी ने भी अभी तक इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, ऐसा पार्टी सूत्रों का कहना है।
हस्ताक्षर जुटाने की जिम्मेदारी
लोकसभा में विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर जुटाने की जिम्मेदारी तृणमूल की डिप्टी लीडर शताब्दी रॉय संभाल रही हैं।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आरोप
तृणमूल कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए मुख्य रूप से तीन आरोप लगाए हैं।
-पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित गड़बड़ी
-राज्य के लोगों के मताधिकार छीनने की कोशिश
-अपने संवैधानिक पद का अनुचित उपयोग और प्रशासन के शीर्ष पदों पर बैठे जनप्रतिनिधियों के साथ दुर्व्यवहार
इन आरोपों के आधार पर बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग कर रही है।
राज्यसभा में भी प्रस्ताव लाने की तैयारी
तृणमूल कांग्रेस ने इस महाभियोग नोटिस को राज्यसभा में भी पेश करने की संभावना खुली रखी है। पार्टी सांसद नादिमुल हक विपक्षी सांसदों से संपर्क करके हस्ताक्षर जुटा रहे हैं।
संसदीय सूत्रों के अनुसार राज्यसभा के लगभग 60 सांसदों ने भी इस नोटिस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। राज्यसभा में ऐसा नोटिस पेश करने के लिए कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं।
तृणमूल की योजना है कि इस सप्ताह ही संसद के कार्यालय में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस जमा किया जाए।
प्रस्ताव पास करने की प्रक्रिया
महाभियोग प्रस्ताव संसद के किसी भी एक सदन में पेश किया जा सकता है। लेकिन इसे पारित कराने के लिए विशेष बहुमत की जरूरत होती है। इसका मतलब है कि संबंधित सदन के कुल सदस्यों का बहुमत और उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई का समर्थन आवश्यक होगा।
इसके अलावा 1968 के जजेस इंक्वायरी एक्ट के अनुसार अगर दोनों सदनों में एक ही दिन नोटिस दिया जाता है, तो जब तक दोनों सदनों में प्रस्ताव स्वीकार नहीं हो जाता, तब तक आरोपों की जांच के लिए समिति नहीं बनाई जा सकती।
जब दोनों सदन प्रस्ताव स्वीकार कर लेते हैं, तब लोकसभा के स्पीकर और राज्यसभा के सभापति मिलकर एक संयुक्त जांच समिति गठित करते हैं, जो आरोपों की जांच करती है।