नई दिल्ली/ कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है। पार्टी के सांसद सौगत राय ने एएनआई से कहा कि उनकी पार्टी इस प्रस्ताव को लाने की तैयारी कर रही है और 100 से अधिक सांसद इसके समर्थन में हैं। संभव है कि हम इसे आज ही पेश कर दें। इस मुद्दे पर विपक्ष एकजुट नजर आएगा। पार्टी का आरोप है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।
सौगत राय ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया जाएगा। चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया को लेकर कई शिकायतें हैं। जिस तरह एसआईआर की प्रक्रिया को अपनाया गया, जिस तरह इस प्रक्रिया के दौरान लोगों की जान गई और जिस तरीके से मतदाता सूची प्रकाशित की गई, इन सभी बातों को सामने लाना जरूरी है। राय ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के बाद उन्हें उम्मीद है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने से जुड़ा यह प्रस्ताव आगे बढ़ेगा।
तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर लोकसभा के 100 से अधिक सांसदों और राज्यसभा के 50 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं।
टीएमसी सूत्रों का कहना है कि सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद यह प्रस्ताव जमा किया जाएगा और संभावना है कि इसे कल पेश किया जाए।
सौगत राय ने पत्रकारों से कहा कि पार्टी अभी अन्य सांसदों से भी समर्थन के लिए हस्ताक्षर करवा रही है। एक-दो दिन में जब हम इसे जमा करेंगे, तब इसकी पुष्टि हो जाएगी।
इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी ने भी टीएमसी का समर्थन किया है। पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव में उनकी पार्टी टीएमसी के साथ है। समाजवादी पार्टी के एक अन्य सांसद राजीव राय ने कहा कि वह चुनाव आयोग के खिलाफ आवाज उठाने वालों में सबसे पहले थे। उन्होंने कहा, “हम महाभियोग प्रस्ताव पर टीएमसी के साथ खड़े हैं। मतदाता सूची से 15 हजार नाम गायब होने के मुद्दे पर मैंने चुनाव आयोग के खिलाफ आवाज उठाई थी, लेकिन मेरी बात नहीं सुनी गई।”
वहीं, केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा, “टीएमसी सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग दोनों पर सवाल उठा रही है। अगर आपको भारत की सभी संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा नहीं है तो यहां चुनाव लड़ने का क्या औचित्य है? जहां आप चुनाव आयोग को स्वीकार करते हैं, वहीं जाकर चुनाव लड़िए-पाकिस्तान या बांग्लादेश में।”
मालूम हो कि संविधान के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया वही होती है जो सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश को हटाने के लिए अपनाई जाती है। इसके लिए महाभियोग प्रस्ताव पर लोकसभा के कम से कम 100 सांसदों या राज्यसभा के 50 सांसदों के हस्ताक्षर होना जरूरी होता है।
इस बीच सौगत राय ने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ हाल ही में लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के खारिज होने पर भी निराशा जताई। उन्होंने कहा कि यह स्पीकर और पूरी लोकसभा की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष की शिकायतें उठाने का एक मौका था।