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मलय घटक के काम से नाखुश, ममता बनर्जी ने कानून मंत्रालय की जिम्मेदारी अपने हाथों में ली

नवान्न की अधिसूचना में स्पष्ट-फिलहाल मुख्यमंत्री ही देखेंगी कानून विभाग का काम।

कोलकाताः पश्चिम बंगाल सरकार में वरिष्ठ मंत्री मलय घटक के कामकाज को लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष की चर्चा तेज हो गई है। इसी वजह से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कानून मंत्रालय की जिम्मेदारी खुद अपने हाथ में ले ली है। नवान्न की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना में बताया गया है कि कानून विभाग का कार्य अब अस्थायी रूप से मुख्यमंत्री स्वयं देख रही हैं। पार्टी के कई नेताओं और मंत्रियों का कहना है कि मलय घटक के कामकाज से मुख्यमंत्री संतुष्ट नहीं थीं, जिसके कारण यह निर्णय लिया गया है।

बताया जा रहा है कि राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद बाबुल सुप्रियो के पास जो सूचना प्रौद्योगिकी विभाग था, उसका काम भी फिलहाल मुख्यमंत्री ही देख रही हैं। इस मामले पर प्रतिक्रिया जानने के लिए मंगलवार को मलय घटक से कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।

तृणमूल के एक वर्ग का कहना है कि पिछले कुछ समय से पार्टी सुप्रीमो मलय घटक के काम से खुश नहीं थीं। आरोप है कि सिर्फ कानून विभाग ही नहीं, बल्कि उनके पास मौजूद श्रम विभाग के कामकाज को लेकर भी असंतोष था।

इसी दौरान राज्य बार काउंसिल के मौजूदा चुनाव में भी उनकी भूमिका को लेकर पार्टी के भीतर नाराजगी सामने आई है। आरोप है कि तृणमूल समर्थक वकीलों के बीच समन्वय की कमी रही और कई जगह वे आपस में ही मुकाबले में उतर गए।

कुछ महीने पहले ही मलय घटक को तृणमूल कांग्रेस के लीगल सेल के प्रमुख पद से हटाकर उस जिम्मेदारी को चंद्रिमा भट्टाचार्य को सौंप दिया गया था। पार्टी के एक नेता के मुताबिक, पिछले पांच–छह महीनों में मलय घटक के चुपचाप दिल्ली जाने की खबरें भी नेतृत्व के पास पहुंची थीं और इन यात्राओं की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी थी, जिसे पार्टी ने सकारात्मक रूप से नहीं लिया।

दूसरी ओर, श्रम विभाग के कामकाज को लेकर भी सवाल उठे हैं। उत्तर बंगाल के चाय बागान इलाकों में स्कूल के छात्रों के लिए बस सेवा शुरू करने की योजना को लागू होने में काफी देर लगी। आरोप है कि श्रम विभाग की धीमी कार्यप्रणाली के कारण बसों की खरीद और सेवा शुरू करने में अपेक्षा से अधिक समय लग गया।

पार्टी से जुड़े श्रमिक संगठन के एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया कि श्रम विभाग को फिलहाल नई परियोजनाएं शुरू करने से भी रोकने की बात कही गई है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के दिनों में धर्मतला के मेट्रो चैनल पर चल रहे धरना मंच पर भी मलय घटक की उपस्थिति बहुत कम देखने को मिली।

उधर, इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने तंज कसते हुए कहा कि मौजूदा सरकार अब अधिक समय तक नहीं चलने वाली है। उनके मुताबिक, ऐसे में किसी मंत्री को काम सौंपना या न सौंपना ज्यादा मायने नहीं रखता। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल के अधिकतर सदस्य सिर्फ औपचारिक भूमिका में हैं और मलय घटक के साथ क्या हुआ, इसका जवाब वही बेहतर दे सकते हैं।

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