कोलकाताः पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों और निर्देशों को तृणमूल कांग्रेस ने बड़ी राहत के रूप में देखा है। पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी का कहना है कि अदालत के आदेश से वैध मतदाताओं के नाम सूची में जोड़ने का रास्ता खुल गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह प्रतिक्रिया मिली है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी की दलीलों को मान लिया है। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा कि उन्होंने 'SIR' पर कानूनी लड़ाई जीत ली है। इसी आधार पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार शाम धर्मतला के मेट्रो चैनल पर चल रहा अपना धरना फिलहाल स्थगित कर दिया है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पिछले शुक्रवार दोपहर से इस मुद्दे को लेकर धरने पर बैठी थीं। धरना समाप्त करने से पहले उन्होंने कहा कि लोगों को अब न्याय मिलने की उम्मीद बनी है। उन्होंने कहा कि वह पांच दिन से सड़क पर बैठी थीं। जरूरत पड़ने पर वह 50 दिन तक भी बैठ सकती हैं। फिलहाल यह धरना अस्थायी रूप से वापस ले लिया गया है।
मेट्रो चैनल पर मौजूद तृणमूल नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के सामने सुप्रीम कोर्ट में कल की (SIR) सुनवाई का मुख्य बात समझाते हुए अभिषेक बनर्जी ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बंगाल मामले को एक स्पेशल केस माना जाएगा। यह भी कहा गया है कि वोटरों के नाम चुनाव से एक दिन पहले भी वोटर लिस्ट में रजिस्टर किए जा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हमारी सभी मांगें मान ली हैं।"
तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट की कल की सुनवाई में चीफ जस्टिस की बेंच द्वारा दिए गए आदेशों और कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणियों की ध्यान से जांच की है। सीएम ममता ने सुप्रीम कोर्ट में सत्तारूढ़ पार्टी के लिए लड़ रहे वकीलों से भी बात की। धरने पर अपना भाषण शुरू करने से पहले अभिषेक बनर्जी ने ममता बनर्जी से बैकस्टेज थोड़ी देर बात भी की। कलअपने छोटे से भाषण में अभिषेक ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर पॉजिटिव क्यों हैं। अभिषेक ने तर्क दिया कि "चुनाव आयोग 'जानबूझकर' अपने ऐप में गलतियां कर रहा है, ताकि फैसले की प्रक्रिया में देरी हो और वोटर लिस्ट बनाने का काम भी देर से पूरा हो। जो काम 15 दिन में होना चाहिए, उसे 3-4 महीने तक खींचा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने अब एक नया अपीलेट ट्रिब्यूनल बनाया है। अगर चुनाव से एक दिन पहले भी कोई दिक्कत आती है, तो सुप्रीम कोर्ट मामले को देखेगा ताकि देश का कोई भी असली वोटर प्रभावित न हो।"
धरने पर सुप्रीम कोर्ट में 'SIR' केस के मौजूदा स्टेटस के बारे में बताते हुए अभिषेक ने कहा, 'देश की सबसे बड़ी अदालत का भी इलेक्शन कमीशन पर से भरोसा उठ गया है। आयोग को एकतरफा फैसले लेने की इजाजत नहीं दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को फटकार लगाई है....अगर किसी का नाम गैर-कानूनी तरीके से छूट गया है, तो वह व्यक्ति वोटर लिस्ट में दोबारा नाम दर्ज कराने के लिए फॉर्म नंबर 6 भरेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वे इस प्रक्रिया पर कड़ी नजर रखेंगे। जरूरत पड़ने पर मामले को फिर अदालत के सामने भी रखा जा सकेगा।'
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों को सकारात्मक बताते हुए तृणमूल नेतृत्व ने पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि जिन लोगों के नाम मसौदा सूची में नहीं आए हैं या अंतिम सूची से हटाए गए हैं। उनके पास जाकर उन्हें दोबारा आवेदन करने में मदद की जाए। पार्टी के बीएलए-2, बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं और स्थानीय निकायों के नेताओं को मैदान में सक्रिय रहने के लिए कहा गया है।
ममता बनर्जी ने भी पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया जारी रखी जाए। उन्होंने कहा कि पहले जिन 58 लाख लोगों के नाम हटाए गए थे, वे भी अपील कर सकते हैं। जिन मामलों को ए़डजुडिकेशन के तहत विचाराधीन रखा गया है, उन्हें न्याय पाने की प्रक्रिया में साथ लेकर आगे बढ़ना होगा।
तृणमूल नेतृत्व का अनुमान है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रिगेड परेड ग्राउंड में होने वाली सभा के एक-दो दिन बाद ही चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हो सकती है। ऐसे में चुनाव परिणाम आने तक करीब 50 से 55 दिनों तक पार्टी कार्यकर्ताओं को लगातार मैदान में सक्रिय रहना होगा।
इसी दौरान अभिषेक बनर्जी ने मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य का हवाला देते हुए उनसे धरना समाप्त करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उनकी मांगों को मान्यता दी है। आने वाले दिनों में लंबी राजनीतिक लड़ाई लड़नी है। इसलिए उनका स्वस्थ रहना जरूरी है। अभिषेक के अनुरोध पर ही मुख्यमंत्री ने धरना फिलहाल खत्म करने का फैसला लिया।