नई दिल्ली: एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित होने से देश के रेस्तरां कारोबार पर भी असर पड़ा है। हालांकि अब हालात धीरे-धीरे संभलते दिखाई दे रहे हैं। फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म मैजिकपिन के अनुसार, शुरुआत में ऑर्डर में आई गिरावट के बाद अब मांग धीरे-धीरे वापस आने लगी है। बिजनेस में बाधा न आये इसके लिए रेस्तरां अपने संचालन के तरीके बदलकर स्थिति के अनुरूप ढलने की कोशिश कर रहे हैं।
मैजिकपिन के सीईओ और संस्थापक अंशू शर्मा ने बताया कि इस संकट का सबसे ज्यादा असर छोटे रेस्तरांओं पर पड़ा है। खाना पकाने के लिए बड़े पैमाने पर एलपीजी सिलेंडरों पर निर्भर रहने वाले परेशानी का सामना कर रहे। उन्होंने कहा कि जिन व्यंजनों की तैयारी में गैस की खपत ज्यादा होती है, उनसे जुड़े ऑर्डर में शुरुआत में लगभग 5 से 10 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई थी।
हालांकि अब कई रेस्तरां अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव कर रहे हैं, जिसके कारण मांग फिर से बढ़ने लगी है। शर्मा के मुताबिक कई रेस्तरां ने अस्थायी तौर पर अपने मेन्यू में बदलाव किया है और कुछ व्यंजनों को सीमित कर दिया है। साथ ही वे इंडक्शन कुकिंग, लकड़ी से चलने वाले चूल्हों और इलेक्ट्रिक ओवन जैसे विकल्पों का उपयोग कर रहे हैं।
मैजिकपिन ने यह भी घोषणा की है कि वह अगले कुछ दिनों में लगभग 10,000 प्रभावित रेस्तरां साझेदारों को इंडक्शन कुकिंग स्टोव वितरित करेगा। इसकी वजह यह कि गैस की कमी के बावजूद वे अपना कारोबार जारी रख सकें। शर्मा का कहना है कि रेस्तरां उद्योग ने पहले भी कई संकटों का सामना किया है और यह मौजूदा समस्या भी दीर्घकालिक नहीं रहने की उम्मीद है।
दूसरी ओर, कई रेस्तरां मालिकों ने बताया कि एलपीजी की कमी ने रसोई संचालन को काफी कठिन बना दिया है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के रेस्तरां ‘पिज़्ज़ा-ए-गुडनेस’ के मालिक नरेंद्र यादव ने कहा कि गैस की कमी के कारण कुछ ऐसे व्यंजन कम करने पड़े हैं जिन्हें तैयार करने में अधिक समय और गैस लगती है।
उनके मुताबिक अब रसोई में जहां संभव हो वहां इलेक्ट्रिक ओवन और इंडक्शन कुकिंग का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोई भी रेस्तरां अपना मेन्यू कम नहीं करना चाहता, लेकिन रसोई को चालू रखने के लिए परिस्थितियों के अनुसार बदलाव करना जरूरी हो गया है।
इसी तरह बेंगलुरु स्थित ‘हैदराबाद बिरयानी हाउस’ की मालिक स्वप्ना ने बताया कि स्वतंत्र रूप से चलने वाले छोटे रेस्तरां के लिए यह स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि कई छोटे इलाके के रेस्तरां फिलहाल अपनी रसोई अस्थायी रूप से बंद करने पर मजबूर हो गए हैं। एलपीजी गैस की आपूर्ति अनिश्चित है और काला बाजार में सिलेंडरों की कीमतें काफी ज्यादा बताई जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि स्थिति से निपटने के लिए कुछ गैस-आधारित व्यंजनों को मेन्यू से कम किया गया है। सीमित मेन्यू के साथ काम किया जा रहा है। कई जगहों पर रेस्तरां के कामकाज के समय भी घटाए गए हैं।
इस बीच ऊर्जा आपूर्ति पर बढ़ते दबाव को देखते हुए सरकार ने भी अस्थायी कदम उठाए हैं। भारत ने घरेलू उपयोग के लिए केरोसिन को अस्थायी रूप से फिर से उपलब्ध कराने की अनुमति दी है। इसके साथ ही होटलों और रेस्तरां को कोयला और अन्य वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल की अनुमति भी दी गई है।
यह कदम उस समय उठाया गया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद हो गया है। यही वह मार्ग है जिससे भारत के कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी आयात का बड़ा हिस्सा सामान्यतः गुजरता है।