न्यूयॉर्क: अमेरिका ने अपने कई व्यापारिक साझेदार देशों के खिलाफ जांच शुरू की है। इस जांच का मकसद यह पता लगाना है कि क्या इन देशों की कुछ नीतियां और व्यापारिक तरीके अमेरिकी उद्योग और कारोबार को नुकसान पहुंचा रहे हैं। जांच जिन देशों के खिलाफ शुरू की गई है, उनमें भारत, चीन, जापान और यूरोपीय संघ (EU) भी शामिल हैं।
किसने की जांच की घोषणा
अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने बताया कि यह जांच ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 (b) के तहत शुरू की गई है। इसमें अलग-अलग देशों की उन नीतियों और कामकाज की समीक्षा की जाएगी जो विनिर्माण यानी मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में अधिक उत्पादन और अतिरिक्त क्षमता से जुड़ी हैं।
किन देशों की हो रही है जांच
इस जांच के दायरे में कई देश और आर्थिक क्षेत्र शामिल हैं। इनमें बांग्लादेश, कंबोडिया, चीन, यूरोपीय संघ, भारत, इंडोनेशिया, जापान, कोरिया, मलेशिया, मैक्सिको, नॉर्वे, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड, ताइवान, थाईलैंड और वियतनाम शामिल हैं। जांच शुरू होने के बाद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय को उन देशों की सरकारों से बातचीत करनी होगी जिनकी नीतियों की जांच की जा रही है और उनसे परामर्श की मांग की गई है।
जांच का उद्देश्य क्या है
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) के अनुसार इस जांच में यह देखा जाएगा कि क्या इन देशों की नीतियां अमेरिकी व्यापार के लिए अनुचित या भेदभावपूर्ण हैं और क्या उनसे अमेरिका के व्यापार या उद्योग पर दबाव पड़ रहा है।
अमेरिका का क्या कहना है
जेमिसन ग्रीर ने कहा कि अमेरिका अब अपने औद्योगिक ढांचे को कमजोर नहीं होने देगा। उनका कहना है कि कुछ देश अपनी जरूरत से ज्यादा उत्पादन कर रहे हैं और उस अतिरिक्त सामान को दूसरे देशों में भेज रहे हैं, जिससे अमेरिकी उद्योग प्रभावित हो रहा है।
ट्रंप प्रशासन का उद्देश्य
ग्रीर ने कहा कि यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस नीति का हिस्सा है, जिसके तहत महत्वपूर्ण सप्लाई चेन को फिर से अमेरिका में लाने और अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में बेहतर वेतन वाली नौकरियां पैदा करने की कोशिश की जा रही है।
अमेरिकी उद्योग पर असर की चिंता
ग्रीर के अनुसार कई देशों में उत्पादन इतना अधिक हो रहा है कि वे अपने देश में उस सामान का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में वह अतिरिक्त सामान विदेशों में भेजते हैं। इससे अमेरिका में बनने वाले उत्पादों को नुकसान पहुंचता है और नई फैक्ट्रियों में निवेश भी प्रभावित हो सकता है। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में अमेरिका की घरेलू उत्पादन क्षमता कम हो गई है और कुछ मामलों में अमेरिका विदेशी प्रतिस्पर्धियों से पीछे भी रह गया है।
कानून के तहत कार्रवाई
ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 का इस्तेमाल उन विदेशी नीतियों के खिलाफ किया जा सकता है जो अमेरिकी व्यापार के लिए अनुचित, भेदभावपूर्ण या नुकसान पहुंचाने वाली मानी जाती हैं। इस कानून की धारा 302(b) के तहत अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि खुद भी जांच शुरू कर सकते हैं।
कैसे आगे बढ़ेगी जांच
धारा 301(b) के तहत की गई जांच में यह देखा जाता है कि किसी विदेशी देश की नीतियां अमेरिकी व्यापार के लिए अनुचित हैं या नहीं और क्या वे अमेरिकी कारोबार को सीमित या प्रभावित करती हैं। जेमिसन ग्रीर ने यह जांच शुरू करने से पहले सेक्शन 301 समिति और अन्य सलाहकार समितियों से भी राय ली थी।
आगे की प्रक्रिया
इस जांच पर सुझाव और टिप्पणियां देने के लिए 17 मार्च 2026 से आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय 5 मई 2026 से इस मामले पर सुनवाई भी करेगा।