तेहरान : अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान के युद्ध के बीच महत्वपूर्ण खाड़ी जलमार्ग हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद हो जाने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ रही है। इस स्थिति में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कहा है कि वे हॉर्मुज जलडमरूमध्य से एक लीटर तेल भी जाने नहीं देंगे। आईआरजीसी के खातम अल-अनबिया मुख्यालय के एक प्रवक्ता ने बुधवार को कहा कि अमेरिका, इजराइल या उनके मित्र देशों से जुड़े किसी भी जहाज को “वैध लक्ष्य” माना जाएगा।
एक बयान में प्रवक्ता ने कहा कि आप कृत्रिम तरीके से तेल की कीमत कम नहीं कर पाएंगे। प्रति बैरल तेल की कीमत 200 डॉलर तक पहुंच सकती है, इसके लिए तैयार रहें। तेल की कीमत क्षेत्रीय सुरक्षा पर निर्भर करती है, और इस क्षेत्र की अस्थिरता का मुख्य स्रोत आप ही हैं।
इस गतिरोध के कारण इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने घोषणा की है कि उसके 32 सदस्य देश मिलकर आपातकालीन भंडार से कुल 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने पर सहमत हुए हैं, ताकि बाजार में कीमतें कम की जा सकें। पेरिस स्थित एजेंसी के मुख्यालय से आईईए के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने कहा कि बाजार में जो अस्थिरता पैदा हुई है, उसके तत्काल प्रभाव को कम करने के लिए यह बड़ा कदम उठाया गया है।
आईईए ने एक बयान में कहा कि प्रत्येक सदस्य देश अपनी सुविधा के अनुसार समय-सारणी तय करके इस तेल के भंडार को बाजार तक पहुंचाएगा, हालांकि विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। जर्मनी और ऑस्ट्रिया ने कहा है कि वे अपने आपातकालीन तेल भंडार का एक हिस्सा जल्द ही बाजार में जारी करने का निर्णय लेंगे। वियना ने बताया है कि उसने राष्ट्रीय रणनीतिक गैस भंडार बढ़ाने का फैसला किया है।
इसके साथ ही जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्रालय ने कहा है कि वे अपने सरकारी और निजी भंडार से लगभग 8 करोड़ बैरल तेल जारी करेंगे, क्योंकि 70 प्रतिशत तेल उसी मार्ग से आता है। सोमवार से यह तेल जारी करना शुरू होगा।
28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध की समय सीमा को लेकर अनिश्चितता भी बढ़ रही है। युद्ध रुकने का कोई संकेत अभी तक दिखाई नहीं दे रहा है। इसके कारण तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग पांचवा हिस्सा हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता-जाता है।
यह मार्ग बंद हो जाने और खाड़ी के कुछ देशों में उत्पादन कम होने के कारण और बड़े पैमाने पर ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंका पैदा हो गई है। बुधवार को भी समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने बताया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तीन जहाजों पर मिसाइल या प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ। इनमें ओमान के उत्तर में लगभग 11 नॉटिकल मील (18 किलोमीटर) दूर एक थाई ध्वज वाला कार्गो जहाज भी हमले का शिकार हुआ, जो भारत के कांडला पोर्ट की ओर आ रहा था।
युद्ध के प्रभाव से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा और उससे निपटने के लिए क्या किया जा सकता है, इस पर जी-7 देशों और यूरोपीय संघ सहित दुनिया के विभिन्न नेता चर्चा कर रहे हैं। कोपेनहेगन विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रोफेसर और समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञ क्रिश्चियन बुगर ने कहा कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य जल्दी नहीं खोला गया तो यूरोप बड़े ऊर्जा संकट में पड़ सकता है।
उनके अनुसार यदि बहुत जल्दी कोई मजबूत संकेत नहीं मिलता कि कम से कम कोशिश करके जलडमरूमध्य को पार किया जा सकता है, तो एक बड़ा शिपिंग संकट पैदा हो सकता है, जो कुछ सप्ताह से लेकर कई महीनों तक चल सकता है।