बर्लिन : जर्मनी की कार निर्माता कंपनी वोक्सवैगन ने बताया है कि 2030 तक जर्मनी में लगभग 50 हजार कर्मचारियों की छंटनी की जाएगी। कंपनी का मुनाफा लगभग एक दशक में सबसे निचले स्तर पर आने के बाद यह फैसला लिया गया है।
चीन की इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा, उत्पादन लागत में वृद्धि और अमेरिका के शुल्क इन सभी कारणों से कंपनी की आय पर दबाव बढ़ गया है। इसके परिणामस्वरूप कारोबार की स्थिति और कठिन होती जा रही है।
कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट में शेयरधारकों को लिखे पत्र में सीईओ ओलिवर ब्लूम ने कहा कि कुल मिलाकर जर्मनी में वोक्सवैगन ग्रुप में 2030 तक लगभग 50 हजार नौकरियां कम की जाएंगी।
किन-किन ब्रांडों पर पड़ेगा असर
इससे पहले 2024 के अंत में वोक्सवैगन ने मजदूर संगठनों के साथ एक समझौता किया था। उस समझौते के अनुसार मुख्य वोक्सवैगन ब्रांड में ही 2030 तक 35,000 कर्मचारियों की छंटनी की योजना बनाई गई थी। इसका लक्ष्य हर साल लगभग 1500 करोड़ यूरो खर्च कम करना था।
नए फैसले के बाद केवल मुख्य वोक्सवैगन ब्रांड ही नहीं, बल्कि कंपनी के अन्य प्रीमियम ब्रांडों पर भी असर पड़ेगा। इनमें Audi, Porsche और कंपनी की सॉफ्टवेयर यूनिट कैरियाड शामिल हैं।
बढ़ रही है प्रतिस्पर्धा
2025 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विदेशी कार निर्माताओं पर शुल्क लगा दिया था। हालांकि उससे पहले ही वोक्सवैगन कई समस्याओं का सामना कर रही थी। यूरोप में कारों की मांग कुछ कम हुई है। साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण में बड़ी मात्रा में निवेश करना पड़ रहा है। लेकिन सभी बाजारों में ईवी की मांग समान नहीं है। इसलिए खर्च बढ़ने के बावजूद बिक्री उसी गति से नहीं बढ़ रही है।
दुनिया के सबसे बड़े कार बाजार चीन में लंबे समय तक वोक्सवैगन की मजबूत स्थिति थी। लेकिन अब वहां स्थानीय कंपनियों के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। खासकर BYD और Geely जैसी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा में बिक्री के मामले में वोक्सवैगन पीछे रह रही है।
मुनाफा घटा
2025 में वोक्सवैगन का ऑपरेटिंग मुनाफा लगभग 890 करोड़ यूरो रहा। पिछले साल की तुलना में यह आंकड़ा लगभग 53 प्रतिशत कम है।
कंपनी का कुल राजस्व 2025 में लगभग 32,200 करोड़ यूरो रहा। 2024 में यह आंकड़ा 32,470 बिलियन यूरो था। 2026 के लिए भी कंपनी की बिक्री वृद्धि का अनुमान बहुत आशाजनक नहीं है। वोक्सवैगन ने बताया है कि इस साल राजस्व वृद्धि दर 0 से 3 प्रतिशत के बीच रह सकती है।