नई दिल्लीः लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए विपक्ष द्वारा लाया गया प्रस्ताव हाल ही में सदन में खारिज हो गया। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को बिरला को पत्र लिखकर इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी और विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव व्यक्तिगत स्वार्थ से प्रेरित था और कुछ लोग वंशवादी सोच के कारण लोकतांत्रिक संस्थाओं को सीमित दायरे में रखने की कोशिश करते हैं।
मोदी ने अपने पत्र में कहा कि लोकसभा में आपके खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव सदन द्वारा स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया गया। उन्होंने सदन के सदस्यों को भी बधाई दी कि उन्होंने इस राजनीतिक कदम को निर्णायक तरीके से नकार दिया।
मोदी ने लिखा कि प्रस्ताव के खारिज होने के बाद लोकसभा अध्यक्ष द्वारा सदन में दिया गया वक्तव्य उन्होंने ध्यान से सुना। उनके अनुसार संसद के इतिहास, अध्यक्ष की जिम्मेदारियों और संसदीय नियमों की सर्वोच्चता पर जिस संयम और स्पष्टता के साथ विचार रखे गए, वह सराहनीय थे।
भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी संवैधानिक संस्थाएं हैं और संसद उनमें सर्वोच्च मंच है। संसद में उठने वाली हर आवाज देश के करोड़ों नागरिकों की उम्मीदों और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है। लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका केवल सदन की कार्यवाही संचालित करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह संसदीय परंपराओं, नियमों और संस्थागत गरिमा के संरक्षक भी होते हैं। सदन में यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि कोई भी व्यक्ति नियमों से ऊपर नहीं है और यह लोकतंत्र की मूल भावना को मजबूत करता है। लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं और विचारों की विविधता ही उसे जीवंत बनाए रखती है लेकिन असहमति और असम्मान के बीच एक स्पष्ट सीमा होती है। उन्होंने चिंता जताई कि कई बार राजनीतिक मतभेद संसदीय मर्यादा की अनदेखी में बदल जाते हैं। ऐसी परिस्थितियों में अध्यक्ष की भूमिका की असली परीक्षा होती है और इन हालात में बिरला ने जिस संयम, धैर्य और निष्पक्षता का परिचय दिया, वह प्रशंसनीय है।
उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि देश के कई लोगों ने महसूस किया कि यह प्रस्ताव व्यक्तिगत स्वार्थ और अहंकार से प्रेरित था। ऐसी घटनाएं लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास रखने वालों को निराश करती हैं। मोदी ने कहा कि संसद का मूल स्वरूप संवाद, तर्कपूर्ण बहस और विचार-विमर्श पर आधारित है। सदन में हर विचार को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। उनके अनुसार लोकसभा अध्यक्ष के रूप में बिरला ने लगातार प्रयास किया है कि अधिक से अधिक सांसदों को बोलने का मौका मिले, चाहे वे युवा सांसद हों, पहली बार चुने गए प्रतिनिधि हों या महिला सांसद।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के लोग यह देखकर चिंतित होते हैं कि कुछ लोग वंशवादी और सामंती सोच के कारण लोकतांत्रिक संस्थाओं को अपने सीमित दायरे में रखना चाहते हैं। ऐसे लोग नए नेताओं के उभरने और युवा सांसदों को समान अवसर मिलने को सहजता से स्वीकार नहीं कर पाते। यह सोच लोकतंत्र की भावना के विपरीत है। लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ यह है कि अवसर कुछ लोगों तक सीमित न रहें, बल्कि समाज के हर वर्ग और देश के हर क्षेत्र की आवाज को मंच मिले।
प्रधानमंत्री का यह पत्र लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा करते हुए आभार जताया। उल्लेखनीय है कि लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए विपक्ष द्वारा लाया गया प्रस्ताव बुधवार को सदन में चर्चा के बाद ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया था।