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कोल इंडिया की सहायक कंपनी SECL का दावा: पश्चिम एशिया संकट के बावजूद देश में कोयले की कमी नहीं होगी

होरमुज जलडमरूमध्य पर तनाव के बीच घरेलू कोयला उत्पादन पर बढ़ा फोकस। 23 मिलियन टन कोयला स्टॉक से बिजली क्षेत्र को मिला सुरक्षा कवच।

By श्वेता सिंह

Mar 16, 2026 13:48 IST

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ गया है। खासकर होरमुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर असर पड़ने से आयातित कोयला और एलएनजी की कीमतें भी बेहिसाब ढंग से बढ़ने लगी हैं। इस स्थिति के बीच देश की ऊर्जा जरूरतों को लेकर कोल इंडिया लिमिटेड की प्रमुख सहायक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने भरोसा जताया है कि वह घरेलू कोयला मांग, विशेषकर बिजली क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

SECL के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक हरीश दुहन के मुताबिक कंपनी ने मौजूदा वित्त वर्ष में मजबूत परिचालन प्रदर्शन बनाए रखा है। मार्च के मध्य तक कंपनी का कोयला उत्पादन लगभग 165 मिलियन टन तक पहुंच चुका था, जबकि 169 मिलियन टन से अधिक कोयले का डिस्पैच किया जा चुका है। इससे देश के विभिन्न बिजली संयंत्रों को लगातार आपूर्ति सुनिश्चित हो रही है और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला स्थिर बनी हुई है।

मेगा खदानों में रिकॉर्ड उत्पादन

कंपनी की बड़ी खदान परियोजनाएं उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। दीपका मेगा माइन इस वित्त वर्ष में 35 मिलियन टन से अधिक उत्पादन का आंकड़ा पार कर चुकी है और अपने अब तक के सबसे अधिक वार्षिक उत्पादन की ओर बढ़ रही है।

वहीं गेवरा खदान, जिसे एशिया की सबसे बड़ी कोयला खदान माना जाता है, 50 मिलियन टन से अधिक उत्पादन हासिल कर चुकी है। इसके अलावा कुसमुंडा खदान से भी इस वर्ष 30 मिलियन टन से अधिक उत्पादन होने की संभावना है। इन परियोजनाओं के कारण कंपनी का कुल उत्पादन स्तर मजबूत बना हुआ है।

मांग बढ़ने पर भी पर्याप्त कोयला भंडार

SECL के पास फिलहाल करीब 23 मिलियन टन कोयले का स्टॉक मौजूद है। यह बिजली क्षेत्र की मांग में संभावित बढ़ोतरी की स्थिति में पर्याप्त बफर प्रदान करता है। इसके अलावा कंपनी के पास लगभग 12 मिलियन टन संभावित कोयला संसाधन भी उपलब्ध हैं, जिन्हें जरूरत पड़ने पर तुरंत उत्पादन में बदला जा सकता है।

कंपनी ने खनन संचालन के लिए आवश्यक भूमि, मशीनरी और परिवहन व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित कर रखी हैं। साथ ही SECL से जुड़े कई बिजली संयंत्र भी पर्याप्त कोयला भंडार बनाए हुए हैं। इससे बिजली उत्पादन में किसी प्रकार की बाधा की संभावना कम हो जाती है।

लॉजिस्टिक्स मजबूत, बिजली संयंत्रों को प्राथमिकता

कोयले की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए SECL लॉजिस्टिक्स पर भी विशेष ध्यान दे रही है। रेलवे रेक लोडिंग बढ़ाई गई है और भारतीय रेलवे के साथ समन्वय मजबूत किया गया है, ताकि देशभर के बिजली संयंत्रों तक कोयला तेजी से पहुंच सके। बिजली क्षेत्र को प्राथमिकता के आधार पर आपूर्ति देने की रणनीति भी अपनाई गई है।

ऊर्जा सुरक्षा में SECL की अहम भूमिका

SECL, एनटीपीसी, राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL) और मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) जैसे प्रमुख बिजली उत्पादकों को कोयला उपलब्ध कराती है। ऐसे में वैश्विक ऊर्जा अनिश्चितताओं के दौर में कंपनी की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

कंपनी का कहना है कि बढ़ती बिजली मांग और वैश्विक ऊर्जा संकट के बावजूद देश में कोयले की उपलब्धता बनाए रखने के लिए वह पूरी क्षमता से काम कर रही है। इससे न केवल बिजली आपूर्ति स्थिर रहेगी बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।

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