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टाटा मोटर्स का बड़ा फैसला: 1 अप्रैल से कमर्शियल वाहन होंगे महंगे

कच्चे माल की बढ़ती लागत का असर। वैश्विक ऑटो सेक्टर भी सप्लाई चेन और चिप की कमी जैसी चुनौतियों से जूझ रहा।

By श्वेता सिंह

Mar 16, 2026 23:09 IST

मुंबई : देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनी टाटा मोटर्स ने अपने कमर्शियल वाहनों की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की है। कंपनी ने सोमवार को बताया कि 1 अप्रैल 2026 से उसके कमर्शियल वाहन (Commercial Vehicles) महंगे हो जाएंगे। कीमतों में अधिकतम 1.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की जाएगी।

कंपनी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि कच्चे माल और अन्य इनपुट लागत में लगातार हो रही बढ़ोतरी की भरपाई करने के लिए यह फैसला लिया गया है। हालांकि कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि कीमतों में बढ़ोतरी सभी मॉडलों पर समान नहीं होगी। अलग-अलग मॉडल और वेरिएंट के अनुसार कीमतों में बदलाव अलग-अलग रहेगा।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ऑटोमोबाइल उद्योग लागत के बढ़ते दबाव का सामना कर रहा है। उत्पादन से जुड़े खर्चों और कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि के कारण कई कंपनियां अपने उत्पादों की कीमतों में संशोधन कर रही हैं। हाल ही में लग्जरी कार निर्माता मर्सिडीज-बेंज इंडिया ने भी अपने वाहनों की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की थी।

शेयर बाजार में भी टाटा मोटर्स के शेयरों में मजबूती देखने को मिली। सोमवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर कंपनी का शेयर 437.60 रुपये पर बंद हुआ, जो दिन भर के कारोबार में 2.81 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है।इसी बीच एक हालिया रिपोर्ट में वैश्विक ऑटोमोबाइल उद्योग के सामने मौजूद चुनौतियों का भी उल्लेख किया गया है। एलारा सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार इस समय उद्योग को कई संरचनात्मक दबावों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें टैरिफ से जुड़े दबाव, कच्चे माल की ऊंची कीमतें और सप्लाई चेन में जारी व्यवधान प्रमुख हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मेमोरी चिप की कमी उत्पादन पर असर डालने वाली नई चुनौती बनकर उभरी है। इसके साथ ही वैश्विक मांग पर भी व्यापक आर्थिक परिस्थितियों का असर दिखाई दे रहा है। कैलेंडर वर्ष 2026 की शुरुआत अपेक्षाकृत धीमी रही है, जबकि पिछले वर्ष मध्यम स्तर की वृद्धि दर्ज की गई थी।

जनवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार चीन, अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में भी वाहन बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है। चीन में बिक्री 6.8 प्रतिशत घटी, अमेरिका में 0.8 प्रतिशत और यूरोप में 3.9 प्रतिशत की कमी देखी गई।

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