भुवनेश्वर : ‘आज ही तो पिता को घर ले जाने की बात थी!’ मॉर्ग के बाहर बैठकर फूट-फूट कर रो रहे हैं 57 वर्षीय एक व्यक्ति। उनके पिता शतायु थे, उम्र 101 वर्ष। सांड के हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बाद पिता को कटक के SCB मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में लेकर आए थे रुषभ परिडा। उनके पिता को ICU में भर्ती किया गया था। रविवार देर रात वहां एक भयानक आग ने 10 लोगों की जान ले ली। उनमें 101 वर्ष के वह बुजुर्ग भी शामिल थे। पीछे रह गया है अपनों को खोने का दर्द।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार रुषभ परिडा ओडिशा के अंगुल जिले के निवासी हैं। रविवार देर रात जब अस्पताल के ICU में आग लगी उस समय वह ICU के बाहर ही सो रहे थे।
रुषभ ने बताया कि उनके पिता काफी हद तक स्वस्थ हो गए थे। डॉक्टरों ने बताया था कि सोमवार को ही उन्हें छुट्टी दे दी जाएगी लेकिन रात करीब ढाई बजे अचानक रुषभ की नींद खुल गई।
उन्होंने देखा कि चारों ओर आग और धुएं से घिरा हुआ है। उन्हें वहां से बाहर निकाल दिया गया। इसके बाद आज सुबह मॉर्ग में जाकर उन्होंने पिता के जले हुए शव की पहचान की।
लगभग इसी तरह की कहानी जाजपुर की निवासी पुष्पलता पुहान की भी है। उनके पिता को ब्रेन स्ट्रोक होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पुष्पलता ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक के बाद उनके पिता चल नहीं पा रहे थे।
अस्पताल में इलाज के बाद वह धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहे थे। खुद से चल भी पा रहे थे। जल्द ही उन्हें छुट्टी मिल जाएगी ऐसी उम्मीद में थीं पुष्पलता।
रात की उस घटना के बाद सुबह अस्पताल आकर वह अपने पिता को नहीं ढूंढ पा रही थीं। अस्पताल के कर्मचारियों ने उनके पिता का आधार कार्ड देखकर कहा कि मॉर्ग में जाकर खोजिए।
इस घटना की गूंज दूर तक पहुंच गई है। राष्ट्रपति ने शोक व्यक्त किया है। वहीं अस्पताल की ओर से कई तरह की लापरवाही होने के आरोप उठने लगे हैं। नाम उजागर न करने की शर्त पर अस्पताल के एक सुरक्षा कर्मी ने बताया कि आग लगने के समय अस्पताल का ‘फायर अलार्म’ या ‘स्प्रिंकलर’ (आग लगने पर पानी छिड़कने की स्वचालित व्यवस्था) कुछ भी काम नहीं कर रहा था और इस लापरवाही की कीमत दस निर्दोष परिवारों को चुकानी पड़ी।