नई दिल्लीः राज्यसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने देश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। कई राज्यों में क्रॉस वोटिंग, विधायकों की अनुपस्थिति और राजनीतिक रणनीतियों ने चुनाव परिणामों को प्रभावित किया, जिससे सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
ओडिशा: क्रॉस वोटिंग पर कांग्रेस की सख्त कार्रवाई
ओडिशा में पार्टी लाइन के खिलाफ मतदान करने के आरोप में कांग्रेस ने अपने तीन विधायकों- सोफिया फिरदौस, रमेश जेना और दसरथी गोमांगो को निलंबित कर दिया है। कांग्रेस ने अपने विधायकों के साथ बीजेडी उम्मीदवार को समर्थन दिया था, लेकिन क्रॉस वोटिंग के कारण भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे जीतने में सफल रहे। इस परिणाम से विपक्ष को नुकसान हुआ, जबकि भाजपा और अन्य उम्मीदवारों को बढ़त मिली।
बिहार: सभी सीटों पर NDA का कब्जा
बिहार में एनडीए ने पांचों राज्यसभा सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी मजबूती दिखाई। विपक्षी दलों के कुछ विधायकों की अनुपस्थिति और आंतरिक असहमति को इस परिणाम का एक बड़ा कारण माना जा रहा है। भाजपा नेताओं ने इसे गठबंधन की एकजुटता का परिणाम बताया, जबकि विपक्ष ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
हरियाणा: एक-एक सीट, लेकिन विवाद गहरा
हरियाणा में भाजपा और कांग्रेस दोनों को एक-एक सीट मिली, लेकिन यहां भी विवाद कम नहीं हुआ। कांग्रेस नेता कुमारी सैलजा ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान अलोकतांत्रिक तरीके अपनाए गए और इस मुद्दे को गंभीरता से देखने की जरूरत है। वहीं भाजपा नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए विपक्ष पर अपनी कमजोरी छिपाने का आरोप लगाया।
विपक्ष के आरोप और राजनीतिक बयानबाजी
राजद सांसद सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि जहां भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत नहीं था, वहां उसने विपक्षी विधायकों को प्रभावित करने की कोशिश की। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। दूसरी ओर भाजपा नेताओं ने कहा कि विपक्ष अपनी एकता बनाए रखने में विफल रहा है, जिसका असर नतीजों में दिखा।