नई दिल्ली: सचमुच एक ही यात्रा में अलग-अलग परिणाम। लंबी दूरी की ट्रेन के ऑनलाइन टिकट और काउंटर टिकट में बीमा सुविधा होने या न होने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे से सवाल किया है। शीर्ष अदालत का सवाल है कि जो यात्री रेलवे के रिजर्वेशन काउंटर से टिकट खरीदते हैं, वे 'ट्रैवल इंश्योरेंस' के दायरे में क्यों नहीं आते? जबकि ऑनलाइन टिकट बुक करने वाले यात्री आसानी से यह सुविधा पा रहे है! सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया कि एक ही ट्रेन यात्रा में केवल टिकट खरीदने के तरीके के आधार पर यात्रियों के बीच इस तरह का भेदभाव किसी भी तरह से उचित नहीं है।
लंबी दूरी की ट्रेन यात्रा के टिकट में बीमा के इस भेदभाव का मामला एक याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट के सामने आया। इसमें कहा गया कि फिलहाल रेल यात्रा बीमा की सुविधा केवल ऑनलाइन टिकट बुक करने वाले यात्रियों को ही मिल रही है। ऑनलाइन टिकट बुक करते समय यात्रियों को एक विकल्प दिया जाता है। जो इच्छुक होते हैं, वे टिकट बुक करते समय मामूली प्रीमियम देकर बीमा सुविधा ले सकते हैं लेकिन रेलवे के रिजर्वेशन काउंटर से टिकट खरीदने पर यात्रियों को यह मौका नहीं मिलता।
बीमा में इस असमानता पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि ट्रेन यात्रियों के लिए एक बार कोई सुविधा शुरू की जाती है तो सभी यात्रियों को उसका अधिकार होना चाहिए। टिकट किस तरीके से खरीदा गया है, इस आधार पर उस सुविधा को देना या न देना किसी भी तरह से उचित नहीं है।
रेलवे सूत्रों के अनुसार, यात्रियों के लिए यह 'ट्रैवल इंश्योरेंस' एक वैकल्पिक सुरक्षा के रूप में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य यात्रा के दौरान दुर्घटना होने पर यात्री या उसके परिवार को आर्थिक सहायता देना है। ट्रेन दुर्घटना में यात्री की मृत्यु होने या उसके शरीर का कोई अंग स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त होने पर आमतौर पर इस बीमा के तहत मुआवजा दिया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कुछ यात्री ऑनलाइन टिकट बुक करते हैं और कुछ काउंटर से टिकट लेते हैं। टिकट खरीदने के तरीके के आधार पर बीमा सुविधा में भेदभाव करना ठीक नहीं है। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि देश के कई यात्री अभी भी रिजर्वेशन काउंटर से टिकट खरीदते हैं, खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में। ऐसे में अगर बीमा सुविधा केवल ऑनलाइन टिकट से जुड़ी रहेगी तो बड़ी संख्या में यात्री इससे वंचित रह जाएंगे। अदालत ने इसका विरोध किया है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान रेलवे ने काउंटर टिकट पर ट्रैवल इंश्योरेंस लागू करने में कुछ व्यावहारिक समस्याओं की बात कही। इनमें से एक बड़ी समस्या यह है कि काउंटर पर टिकट बुक करते समय यात्री से पहचान पत्र नहीं लिया जाता, जबकि बीमा कंपनियां विस्तृत पहचान जानकारी मांगती हैं। ऑनलाइन टिकट बुकिंग के दौरान यात्री की जानकारी पहले से दर्ज होती है। यूजर आईडी बनाते समय यात्री को आधार कार्ड के जरिए अपनी पहचान देनी होती है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे को सुझाव दिया कि इस समस्या का प्रभावी समाधान खोजा जाए।