नई दिल्ली: गैस संकट की आंच अब जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में पहुंच गई है। एलपीजी संकट के कारण कैंटीन और हॉस्टल के मेस के मेन्यू में कटौती की गई है। समोसा, रोटी समेत कई खाद्य पदार्थों को हटा दिया गया है। इसे लेकर छात्रों ने नाराजगी जताई है।
पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण देश में रसोई गैस या एलपीजी की कमी देखने को मिल रही है। इसका असर विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के कैंटीन और मेस पर पड़ने लगा है। अब इसकी मार जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय पर भी पड़ी है। सोमवार को विश्वविद्यालय के छात्रों ने बताया कि कई लोकप्रिय खाद्य पदार्थ पहले ही मेन्यू से गायब हो चुके हैं। दूसरी ओर, हॉस्टल मेस समितियां गैस की उपलब्धता में कमी से निपटने के लिए फूड प्लान में बदलाव कर रही हैं। मेन्यू में परिवर्तन किया गया है।
छात्रों का दावा है कि विश्वविद्यालय परिसर के खाने की दुकानों में भी असर दिखने लगा है। स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के कैंटीन में अब समोसा नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि TEFLAS कैंटीन में चाय भी नहीं मिल रही है। कई हॉस्टलों से भी विभिन्न खाद्य पदार्थ हटा दिए गए हैं।
इस बदलाव की जानकारी देने के लिए अलग-अलग हॉस्टल की मेस समितियों ने नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है। छात्रों के अनुसार, लोहित हॉस्टल में रोज रोटी और पूरी नहीं मिलेगी। केवल मंगलवार और शनिवार को ही रोटी मिलेगी, बाकी दिनों में चावल या खिचड़ी दी जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, विश्वविद्यालय में गैस सप्लाई करने वाली एजेंसी ने सिलेंडरों की संख्या कम करने की सूचना दी है। इसी कारण मेन्यू में बदलाव किया गया है।
हालांकि इस मुद्दे पर छात्र संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि अगर यह स्थिति जारी रही तो हालात और खराब होंगे। छात्रों को आशंका है कि इससे खाने की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ ने बताया कि उचित कदम उठाने की मांग को लेकर मंगलवार को डीन ऑफ स्टूडेंट्स के कार्यालय के बाहर विरोध मार्च करने की घोषणा की गई है। इस स्थिति में कैंपस के मेस और ढाबों में खाने के दाम न बढ़ाने की भी मांग की गई है।