नई दिल्ली : लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को आठ विपक्षी सांसदों का निलंबन खत्म कर दिया है। अब वे दोबारा कार्यवाही में हिस्सा ले सकेंगे। सभी पक्षों ने सदन की गरिमा बनाए रखने और भविष्य में ऐसे विवादों से बचने का भरोसा दिया है। यह कदम तब उठाया गया जब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने निचले सदन में इस संबंध में प्रस्ताव पेश किया।
निलंबन समाप्त होने के बाद संबंधित सांसद गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, डीन कुरियाकोस, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, बी मणिकम टैगोर, डॉ. प्रशांत यादव राव पडोले, चमाला किरण कुमार रेड्डी और एस वेंकटेशन ने संसद परिसर में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद कांग्रेस के मुख्य सचेतक के. सुरेश ने कहा कि कुछ सदस्यों से अनजाने में हुई त्रुटियों के लिए खेद व्यक्त किया जाता है। इसके साथ ही अब इन सांसदों को चल रही संसदीय कार्यवाही में हिस्सा लेने की अनुमति मिल गई है।
निलंबन का कारण
इन आठ सांसदों को 4 फरवरी को बजट सत्र के शेष समय के लिए निलंबित किया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने सदन के नियमों का उल्लंघन किया और हंगामे के दौरान कागज फाड़कर अध्यक्ष की ओर फेंके। यह विवाद उस समय हुआ जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी 2020 में पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सीमा तनाव का विशेष उल्लेख करने की मांग कर रहे थे।
बैठक में बनी सहमति
सूत्रों के अनुसार एक दिन पहले लोकसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में विभिन्न दलों के नेताओं की बैठक हुई, जिसमें इस मुद्दे पर सहमति बनी। बैठक में सभी पक्षों ने संसद की गरिमा और परंपराओं को बनाए रखने पर जोर दिया। यह तय किया गया कि कोई भी सदस्य सदन के वेल में जाकर दूसरे पक्ष के पास नहीं जाएगा, कागज फाड़कर अध्यक्ष की ओर नहीं फेंकेगा और अधिकारियों की मेज पर नहीं चढ़ेगा। साथ ही यह भी आश्वासन दिया गया कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी और सभी सदस्य संसदीय मर्यादा का पालन करेंगे।
संसद सचिवालय की सलाह
लोकसभा सचिवालय ने एक बुलेटिन जारी कर सदस्यों को संसद परिसर में अनुशासन बनाए रखने की याद दिलाई। इसमें स्पीकर द्वारा जारी निर्देश का उल्लेख किया गया, जिसके तहत संसद परिसर में कुछ गतिविधियों पर प्रतिबंध है ताकि मार्ग और क्षेत्र सांसदों के लिए सुगम बने रहें। इस निर्देश के अनुसार हथियार, बैनर, पोस्टर, लाठी, भाला, तलवार, डंडे या पत्थर जैसी वस्तुएं लाना प्रतिबंधित है और संसद के भीतर पोस्टर या प्लेकार्ड लाने या दिखाने से मना किया गया है।
बुलेटिन में यह भी कहा गया कि कुछ मामलों में आपत्तिजनक एआई-निर्मित तस्वीरें और नारे पोस्टरों पर देखे गए हैं। सदस्यों को चेतावनी दी गई है कि नियमों का सख्ती से पालन करें अन्यथा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
कांग्रेस व भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया
कई दलों के सांसदों ने भी इस फैसले का स्वागत किया। कांग्रेस की प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि यह निर्णय अच्छा है और सदन की गरिमा बनाए रखना दोनों पक्षों की जिम्मेदारी है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि यह अच्छा है कि उनके साथी, जो रोजाना सीढ़ियों पर बैठकर विरोध कर रहे थे और सदन में भाग नहीं ले पा रहे थे, अब वापस लौट सकेंगे। भले ही उनसे कुछ निर्णय संबंधी गलतियां हुई हों, लेकिन उन्हें सदन से बाहर रखना लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों पक्षों की ओर से अच्छे व्यवहार के जो आश्वासन दिए गए हैं, उनका पालन किया जाएगा।
भाजपा के रवि किशन ने कहा कि संसद देश की सबसे बड़ी पंचायत है और यहां कामकाज सौहार्द के साथ होना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि यहां व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचना चाहिए। भाजपा के ही अरुण गोविल ने उम्मीद जताई कि विपक्ष के सदस्य सदन की मर्यादा बनाए रखेंगे और नियमों का पालन करेंगे, जिससे कार्यवाही सुचारु रूप से चल सके।