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'सवाल जीत में लीड का नहीं, सवाल यह है कि हमारा टार्गेट क्या है?', जीत को लेकर आत्मविश्वासी दिलीप घोष

दिलीप घोष के नाम की घोषणा होते ही उनके समर्थकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है लेकिन हिरण चट्टोपाध्याय को क्या किसी और सीट से टिकट मिलेगा?

By Elina Dutta, Posted By : Moumita Bhattacharya

Mar 17, 2026 15:17 IST

सोमवार को भाजपा ने अपने 144 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी। इस सूची के जारी होते ही जिस सीट को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है वह है खड़गपुर सदर। इस सीट से साल 2021 के विधायक हिरण चट्टोपाध्याय को सीट न देकर भाजपा ने अपने चुनावी समर में पुराने योद्धा दिलीप घोष पर ही भरोसा जताया है। इसके बाद से ही हिरण चट्टोपाध्याय को टिकट मिलने की संभावनाओं को लेकर भी चर्चाएं होने लगी हैं।

खड़गपुर सदर से भाजपा उम्मीदवार से जब हिरण के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। बल्कि तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी के खिलाफ उन्होंने एक के बाद एक कई निशाने साधे।

खड़गपुर सदर सीट से भाजपा उम्मीदवार के तौर पर दिलीप घोष के नाम की घोषणा होते ही उनके समर्थकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है लेकिन हिरण चट्टोपाध्याय को क्या किसी और सीट से टिकट मिलेगा? इस बारे में सवाल उठते ही भाजपा उम्मीदवार दिलीप घोष ने कहा कि कई विधायक परिवर्तित हुए हैं। पार्टी सोच-विचार कर रही है।

जरूर कोई रास्ता निकलेगा। किसे कौन से काम में लगाया जाएगा, पार्टी जरूर इस बारे में सोचेगी। पिछले लोकसभा चुनाव में अपने इलाके से बाहर घाटाल प्रतिद्वंद्वीता की थी। पार्टी अगर उसे अपने इलाके से बाहर का उम्मीदवार बना सकती है तो निश्चित रूप से कुछ और जरूर सोच रही होगी। जो नेता हैं, वे ही सोच-विचार करेंगे। मेरे लिए सोचना तो संभव नहीं है।

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इसके साथ ही उन्होंने कहा कि चुनाव में टिकट का न मिलना सब कुछ समाप्त होना नहीं है। पार्टी के पुराने नेता राहुल सिन्हा का राज्यसभा में जाने का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी पर भरोसा रखें। राहुलदा (राहुल सिन्हा) कितने दिनों तक पार्टी में किसी भी पद पर नहीं थे। एक बार वह नाराज भी हो गए थे लेकिन सही समय पर पार्टी ने उन्हें सम्मानित किया और राज्यसभा भेजा।

हर समय समान रूप से मौका मिलेगा ऐसा नहीं है। सबको मौका देना होगा। पार्टी के आदर्शों और नेतृत्व पर भरोसा करना होगा। हिरण की दूसरी शादी कहीं टिकट न मिलने की वजह तो नहीं है? इस बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि कौन किससे शादी करेगा? क्या होगा, यह सब बताना मेरे लिए संभव नहीं है।

क्या पिछले 5 सालों में की गयी शिकायतों की वजह से ही क्या टिकट नहीं मिला? इसे मानने से उन्होंने इंकार कर दिया। दिलीप घोष का कहना है कि हर नेता के खिलाफ कोई न कोई शिकायत रहती है। शिकायतें सुनने के लिए मैं नहीं पार्टी के लोग हैं। उनके पास क्या शिकायतें आयी हैं, मुझे इस बारे में नहीं पता। आम जनता की बातें सुननी पड़ती हैं।

जीत को लेकर आश्वस्त

खड़गपुर सदर सीट से अपनी जीत को लेकर आश्वस्त दिलीप घोष ने कहा कि पिछले कुछ चुनावों में खड़गपुर से हमें हमेशा लीड मिली है। लोकसभा में करीब 45,000 वोटों का लीड मिला था वहां से। विधानसभा चुनाव में लीड थोड़ा कम होता है, ऐसा सभी जगहों पर होता है। इसलिए लीड को लेकर कोई सवाल नहीं है। सवाल यह है कि टार्गेट क्या है? यहां के पार्टी कार्यकर्ताओं ने तय किया है कि हमें वहां 1 लाख वोट मिलेगा।

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तृणमूल सुप्रीमो पर बढ़ा दबाव

नंदीग्राम और भवानीपुर दो केंद्रों से शुभेंदु अधिकारी को उम्मीदवार बनाना तृणमूल सुप्रीमो पर राजनैतिक दबाव डाल रहा है। यह कहते हुए दिलीप घोष ने कटाक्ष किया कि उनकी जिम्मेदारी में जब प्रशासन थी तब वह हर 6 महीने में कपड़े बदलने की तरह प्रशासनिक स्तर पर बदलाव करती थी। अधिकारियों के साथ फुटबॉल खेलती थी। क्यों सोचती हैं कि सब कुछ उनके हिसाब से ही चलेगा? चुनाव आयोग ने देखा है कि इन अधिकारियों ने SIR में कोई सहयोग नहीं किया है।

मुख्यमंत्री के प्राणहानि की संभावनाओं को खारिज करते हुए घोष ने कहा कि मुख्यमंत्री खुद पुलिसमंत्री हैं। उनके अपने घर में धक्का मारकर लोग सिर फोड़ देते हैं। उनके जीवन पर जो संकट होगा, वह उनके अपने घर पर होगा, अपनी पार्टी में है। यह सब कहकर लोगों का ध्यान खींचने की कोशिश कर रही हैं। चुनाव की घोषणा से कुछ घंटों पहले ही महंगाई भत्ता की घोषणा से तृणमूल सुप्रीमो को कोई फायदा नहीं मिलेगा।

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